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सरकारी आवास खराब, पॉलीथिन से ढककर काम चला रहे कर्मचारी

नगर में अफसरों व कर्मचारियों को रहने के लिए भले ही सरकारी क्वार्टर उपलब्ध करा दिया गया हो, लेकिन ये क्वार्टर कंडम हो चुके हैं। इसमें सरकारी कर्मचारी रहने मजबूर हैं। बारिश के पानी से बचने क्वार्टर को पॉलीथिन से ढंककर कर्मचारी काम चला रहे हैं।
नगर में पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, वन विकास निगम, सिंचाई विभाग, पुलिस विभाग, आरईएस और राजस्व विभाग के सरकारी कर्मचारियों को रहने के लिए सरकारी क्वार्टर बनाए गए हैं। इनका समय पर मरम्मत नहीं किए जाने से यह अब कंडम हो चुके हैं। इसमें ही सरकारी कर्मचारियों को रहना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारी होने से मरम्मत के लिए विभाग को दबाव भी नहीं बना पाते।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति सिंचाई विभाग, पुलिस विभाग और वन विकास निगम के मकानों का है। यहां वर्षो से कोई मरम्मत नहीं हो पा रही है, जैसे तैसे यहां रहने वाले कर्मचारी ही इसमें स्वयं पैसे लगाकर मरम्मत करा रहे हैं। भवन कंडम होने से हमेशा हादसे का डर बना रहता है। शहर के आरईएस कालोनी, रेस्ट हाऊस के आगे, वन विभाग के पास ऐसे कई शासकीय क्वार्टरों में कर्मचारी निवास कर रहे हैं।
मरम्मत कराई जाती है : पीडब्ल्यूडी के एसडीओ महेंद्र कश्यप ने बताया विभाग के सरकारी क्वार्टर की मरम्मत की जाती है। लिपाई पोताई भी होती है। कुछ मकान कंडम है उसका मरम्मत कराई जाएगी।
मरम्मत के लिए फंड नहीं : सिंचाई विभाग के एसडीओ बीरेंद्र कोड़ोपी ने कहा कि विभाग के सरकारी मकान बेहद खराब है। बारिश में पानी टपकता है। कर्मचारी इसमें रहने मजबूर हैं। मरम्मत के लिए फंड नहीं है, इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

बारिश से बचने स्वयं के खर्च से लगाई पॉलीथिन
कई पुराने सरकारी क्वार्टर खपरैल के होने के कारण परेशानी अधिक हो रही है। बारिश होने पर पानी टपकता है। मरम्मत नहीं होने से समस्या बढ़ गई है। इसको देखते हुए कर्मचारियों ने स्वयं के खर्च से छप्पर को ही पॉलीथिन से ढंककर काम चला रहे हैं। इसके बाद भी छप्पर में सड़ चुके बांस बल्ली गिरते रहने से हमेशा डर बना रहता है। कई कर्मचारी इन परेशानियों के चलते किराए के मकान में रहने मजबूर हैं।



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Government housing deteriorated, workers working covered with polythene


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