दुर्ग संभाग के आईजी विवेकानंद सिन्हा ने लॉकडाउन के बाद अचानक आत्महत्याओं की संख्या में बढ़ते आंकड़ों को देकर पांचों जिलों से रिपोर्ट तैयार करवाई है। रिपोर्टर तैयार हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है। खुदकुशी के बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते है कि वर्ष 2016 से जून 2020 के बीच दुर्ग, राजनांदगांव, बेमेतरा, बालोद और कबीरधाम जिले में 6035 लोगों ने आत्महत्या की है।
इनमें सबसे ज्यादा दुर्ग जिले में 2307 लोगों ने खुदकुशी की। जबकि सबसे कम आंकड़ा कवर्धा जिले का है। यहां पांच वर्षों में सिर्फ 541 लोगों ने ही आत्महत्या की है। रिपोर्ट से पता चला है कि 18 कारण ऐसे है जिनके कारण लोंग मौत को गले लगा रहे है। शादी के बाद विवाद, बीमारी, प्रेम संबंध के कारण ज्यादातर लोगों ने खुदकुशी की है। रिपोर्ट बताती है कि फांसी लगाकर जाने देने का रास्ता लोगों को ज्यादा सरल लगा है।
चौंका रहे सुसाइड के आंकड़े: खुदकुशी को रोकने के लिए दुर्ग रेंज में पुलिस चलाएगी अभियान
सुसाइड के मामलों की रिपोर्ट तैयार कराई है। खुदकुशी के कारणों को एनॉलिसिस कर रहे हैं। सुसाइड को कैसे रोका जा सकता है, इस दिशा में पुलिस काम करेगी।
विवेकानंद सिन्हा, आईजी, दुर्ग रेंज
दुर्ग के बाद राजनांदगांव में ज्यादा हुई खुदकुशी
केस स्टडी के मुताबिक सुसाइड के मामले में दुर्ग के बाद राजनांदगांव है। यहां पांच वर्षों में 1333 लोगों ने अलग-अलग कारणों से खुदकुशी की है। यहां 59% लोगों ने फांसी को अपना माध्यम बनाया। जबकि 29% ने जहर खाकर जान दे दी। इनमें सबसे ज्यादा 76% पुरुष है। 35% की उम्र 19 से 30 वर्ष, 34% की 31 से 45 वर्ष के है तो 20% 46 से 60 वर्ष के है,जिन्होंने आत्महत्या की है। अब सुसाइड रोकने अभियान चलेगा।
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