गीदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। अब कोरोना पॉजिटिव मरीज का इलाज करने वाले कर्मचारियों को दबाव डालकर ड्यूटी पर बुलाने के आरोप प्रभारी बीएमओ डॉ. देवेंद्र प्रताप पर लगे हैं। दरअसल बुधवार की सुबह गीदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 69 साल के एक बुजुर्ग की तबियत खराब होने पर भर्ती किया गया था। करीब डेढ़ घंटे तक जब हालत सही नहीं हुई तो परिजनों के आग्रह पर कोरोना जांच की गई तो वे पॉजिटिव पाए गए, तुरंत उन्हें रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल लाने के बाद उनका इलाज करने वाली डॉक्टर सहित 5 स्टाफ को क्वारेंटाइन की बजाए ड्यूटी पर बुलाया गया।
इन सभी ने खुद स्वीकार भी किया कि चूंकि मरीज स्टाफ नर्स के ही रिश्तेदार थे और अक्सर उनकी तबियत खराब होने पर अस्पताल लाए जाते थे, ऐसे में स्टाफ के लोग उनके नजदीक थे व इलाज किया। इनमें से कुछ ने तो ग्लव्स, मास्क तक नहीं पहना हुआ था। पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप मच गया। नाम नहीं छापने की शर्त पर यहां के स्टाफ ने बताया कि डॉ. देवेन्द्र प्रताप से सभी ने निवेदन किया कि होम क्वारेंटाइन करवा दीजिये पर वे नहीं माने और ड्यूटी पर आने का दबाव बनाया। नौकरी न चली जाए इस भय से संपर्क में आए स्टाफ गुरुवार को अस्पताल के सामान्य मरीजों का इलाज करने मजबूर हुईं। कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा इस मामले की जानकारी नहीं है, पता करता हूं।
कंटेनमेंट जोन में न डॉक्टर पहुंच रहे न समय पर दवा
इधर गीदम में बने वार्ड 4 के कंटेनमेंट जोन की भी हालत खराब पड़ी है। बुधवार की रात किडनी समस्या से जूझ रहे कैलाश राठी की तबियत बिगड़ गई। प्रभारी बीएमओ को जानकारी मिलने पर लंबे इंतजार के बाद कंटेटमेंट जोन के बाहर मुख्य मार्ग तक दवाई तो पहुंचाई, इसके बाद भी मरीज की हालत बिगड़ती गई। जब उनसे निवेदन किया गया कि डॉ. देवांगन को भेज दीजिये तो बीएमओ डॉ. प्रताप भड़क गए और कह दिया कि अगर डॉक्टर उन्हें ही मानते हैं तो इलाज उन्हीं से करवा लो। यहां के लोगों ने बताया कि इस जोन के 2-3 लोग बीमार हैं, जो न तो बाहर निकल पा रहे न दवा मिल रही। गीदम नगर पंचायत अध्यक्ष साक्षी शिवहरे सुराना ने भी इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यहां स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंचने से लोग परेशान हो रहे हैं। कन्टेंटमेंट जोन में डॉक्टर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सीधी बात
डॉ. देवेंद्र प्रताप, प्रभारी बीएमओ गीदम
सवाल - बुधवार को एक बुजुर्ग अस्पताल लाने के बाद कोरोना पॉजिटिव मिले हैं?
- हां।
सवाल - इनके सम्पर्क में अस्पताल के जो भी स्टॉफ थे, उन्हें क्वारेंटाइन क्यों नहीं किया गया?
-सभी ने मास्क, ग्लव्स पहन रखा था। ऐसे में जरूरी नहीं है। मैं खुद भी डायरेक्ट कांटेक्ट में था। डॉ. अनुराधा भी मरीज के सम्पर्क में थीं, अब तक अस्पताल नहीं पहुंचीं, मैं उन्हें ही बुला रहा हूं।
सवाल - आप पर आरोप है कि आपने दबाव डालकर बुलाया है।
- काम के लिए कहना दबाव नहीं है। काम से बचने कुछ लोग जानबूझकर इशू बना रहे। सब क्वारेंटाइन में चले गए तो ड्यूटी कौन करेगा। मैंने सीईओ साहब को भी बता दिया है। अगर कुछ समस्या आई तो 4-5 दिन बाद उनका एंटीजेन टेस्ट कर लेंगे।
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