शहर में 2010-11 से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में शहर में 42 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें से आधे से भी कम मात्र 17 आंगनबाडिय़ों के ही भवन बन पाए हैं। शेष 25 आंगनबाडिय़ों के भवन नहीं बन पाए हैं। इनमे से 20 तो किराए के छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं। जबकि शेष 5 आंगनबाडिय़ां स्कूल के अतिरिक्त कक्ष, रामायण मंडली, सांस्कृतिक भवन में अव्यवस्था के बीच संचालित हो रहे है।
जिन 17 आंगनबाडिय़ों के भवन बन चुके हैं उनमें से भी 6 में तो विधुतीकीरण कार्य नहीं हो पाया है जिससे आंगनबाड़ी संचालित करने में परेशानी होती है। दो आंगनबाड़ी केंद्र के भवन तो बनकर तैयार हो चुके हैं लेकिन अब तक वहां केंद्र लगना शुरू नहीं हो पाए हैं। अलबेलापारा आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बन चुका है जहां केंद्र लगना शुरू नहीं हो पाने से वह खाली पड़ा है। इसी प्रकार संजय नगर का डोंगरीपारा आंगनबाड़ी केंद्र का भी भवन खाली पड़ा है।
छत से टपकता है पानी
टीकाकरण कराने पहुंची खिलेश्वरी नाग, अंजली मेश्राम ने कहा आंगनबाड़ी में बिजली, पानी जरूरी है। जवाहर वार्ड में ही एक और आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक स्कूल के एक भवन में संचालित हो रही है जो काफी छोटा पड़ता है। कमरे काफी छोटे हैं जहां बच्चों के लिए बिजली की सुविधा नहीं है। बिना पंखे के परेशानी होती है। आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में छत की सिलिंंग कंडम स्थिति में है। बारिश के दौरान छत से पानी का रिसाव होता है। स्कूल भवन में छत से सलाखें बाहर आ रही है।
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