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आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महिलाओं का नया प्रयोग: 3 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास, सिट्रोनेला की जिले में पहली बार खेती, इसी से बनेगा इत्र, साबुन व अगरबत्ती

जिले के बम्हनी गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने अपनी मेहनत से लेमन ग्रास व सिट्रोनेला जैसे औषधीय व सुगंधित फसल की खेती शुरू कर दी है। ये ऐसे पौधे हैं, जो सुगंधित वस्तुएं बनाने में भी उपयोग की जाएगी।
इस तरह की खेती का यह कबीरधाम जिले में पहला प्रयोग भी है, जिसमें केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र) के वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं। जिला पंचायत के जरिए महिलाओं को इसकी खेती के लिए जमीन दी गई है। ग्राम बम्हनी में तीन एकड़ भूमि में इसकी खेती की जा रही है।

इस योजना में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना बिहान की तीन महिला समूह को जोड़ा गया है, जिससे उन्हें नियमित रोजगार और आय प्राप्त हो। महिलाओं को इस कार्य के लिए प्रशिक्षित भी किया गया है। केवीके के वैज्ञानिक डॉ. बीपी त्रिपाठी बताते हैं कि प्रदेश में पहली बार महिला समूह के जरिए लेमन ग्रास व सिट्रोनेला की खेती कराई जा रहीं है।
ये दोनों फसल सुगंधित होते हैं, दोनों का उपयोग इत्र, साबुन व अगरबत्ती बनाने में किया जाएगा। खेती के बाद इन फसलों का तेल निकालने का काम जिला पंचायत करेगी। इसी तेल का उपयोग इत्र, साबुन व अगरबत्ती में होगा।

लेमन ग्रास के सेवन करने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
5 साल तक उत्पादन मिलेगा
डॉ. बीपी त्रिपाठी बताते हैं कि लेमन ग्रास की एक बार बुआई करने के बाद पांच साल तक इससे उत्पादन मिलेगा। पहली बार घास महज 120 दिन में कटाई के लायक हो जाएगी। इसके बाद 55 से 70 दिनों के भीतर घास तैयार हो जाएगी। एक एकड़ में 2000 पौधे उगाए जा रहे हैं। यहां डेढ़-डेढ़ एकड़ भूमि में लेमन ग्रास व सिट्रोनेला की खेती की जा रही है। इसी माह दोनों फसल के लिए बुआई किए हैं। ये अगले साल फरवरी-मार्च में तैयार हो जाएंगे।
लेमन ग्रास इसलिए खास
उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक आरएन पांडेय बताते हैं कि लेमन ग्रास की पत्तियों में एक तीखी गंध होती है, इसे चाय के साथ उबालकर पीने से ताजगी व सर्दी से राहत मिलती है। इसकी गंध से जानवर इससे दूर रहते हैं। ग्रास के ऑयल से हर्बल मेडिसीन, काॅस्मेटिक, इत्र व ऑर्गेनिक दवा बनती है। इसका उपयोग सिर व पेट दर्द से बचाव में भी करते हैं। लेमन ग्रास के सेवन करने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

धान की तुलना में कम खर्च
इस साल लेमन ग्रास की खेती 1.50 एकड़ के रकबे में की जा रही है। वैसे बम्हनी में शासन द्वारा 10 एकड़ भूमि में लेमन ग्रास व सिट्रोनेला फसल की खेती की तैयारी थी, लेकिन पहली बार होने के कारण तीन एकड़ में खेती की जा रही है। वहीं बाकी सात एकड़ में फल-फूल व सब्जी की खेती की जा रही है। अभी तक धान की तुलना में कम खर्च आया है। इस फसल को ऊंचाई वाले भूमि में लगाया गया है। जलभराव के कारण ये फसल खराब हो जाते हैं।
आर्थिक फायदा होगा

जिला पंचायत सीईओ विजय दयाराम के. ने बताया कि लेमन ग्रास की खेती से महिला स्वसहायता समूह को आर्थिक फायदा होगा। विभिन्न कंपनियों द्वारा इन हर्बल पौधों के एसेंस को खरीदा जाएगा और मार्केटिंग की कोई समस्या नहीं है। पूर्व में जिस तरह भोरमदेव हर्बल गुलाल, कोदो-कुटकी के लिए मार्केट तैयार किया गया था, उसी तर्ज में इसकी भी मार्केटिंग की जाएगी।



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कवर्धा. ग्राम बम्हनी के डेढ़-डेढ़ एकड़ भूमि में फसल ली जा रही।


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