रायपुर में कोरोना मरीजों की संख्या शनिवार को 31,777 हो गई है। 18 मार्च को पहला केस मिलने के बाद 10 हजार का आंकड़ा पहुंचने में 162 दिन लगे, लेकिन दस से बीस और बीस से तीस हजार मरीज केवल 26 दिन में मिल गए।
अगस्त के दूसरे सप्ताह के बाद से मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी। 10 से बीस हजार मरीज केवल 13 दिनों में मिल गए। बीस से तीस हजार पहुंचने में भी केवल 13 दिन लगे। पिछले तीन दिन से केस भले कम आ रहे हैं विशेषज्ञों का कहना है अभी पीक चल रहा है। हर स्तर पर सावधान रहने की जरूरत है।
रायपुर में अगस्त के दूसरे सप्ताह से औसतन एक हजार मरीज रोज मिल रहे हैं। डॉक्टरइसी को पीक मान रहे हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा मरीज रायपुर में हैं। कुल पॉजिटिव केस के अलावा एक्टिव केस भी यहीं है। 18 मार्च को जब पहला मरीज मिला, तब मार्च-अप्रैल, मई व जून में गिनती के मरीज थे।
जुलाई से केस बढ़ने शुरू हुए और अगस्त व सितंबर में संख्या तेजी से बढ़ी। इस कारण 10 दिनों पहले तक रायपुर में रिकवरी रेट 38 फीसदी तक नीचे आ गया था। अब 66.15 फीसदी के पार हो गया है।
कोरोना- मार्च से अब तक हुए प्रमुख बदलाव
प्रदेश में कोरोना का पहला केस 18 मार्च को आया था। उसके बाद से अब तक इलाज के सिस्टम में कई तरह के बदलाव हो गए हैं। पहले प्रदेश के किसी भी लैब में जांच नहीं हो रही थी। यहां सैंपल लेकर पुणे व नागपुर भेजे जा रहे थे। फिर अप्रैल में जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब में जांच शुरू हुई।
एम्स, नेहरू मेडिकल कॉलेज, सिम्स बिलासपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ व राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी लैब स्थापित है। जहां आरटीपीसीआर किट से कोरोना की जांच हो रही है। इसके अलावा हर जिला अस्पताल में ट्रू नॉट पद्धति से जांच हो रही है। यही नहीं शिविर के अलावा गांवों में एंटीजन किट से टेस्ट किया जा रहा है। वर्तमान में सरकारी के अलावा निजी लैब समेत 150 से ज्यादा सेंटरों में कोरोना जांच की जा रही है।
बचाव के लिए तैयारी
- 832 सेंटरों में एंटीजन किट से जांच, रिपोर्ट आधे घंटे में।
- छह बढ़े वायरोलॉजी लैब, पहले एक भी नहीं।
- 25 एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस।
- एम्स, अंबेडकर अस्पताल में 500- 500 बेड की व्यवस्था।
- 178 कोरोना केयरर सेंटर, वहां 22 हजार से ज्यादा बेड।
- 30 अस्पतालों में 3400 बेड। 776 आईसीयू व एचडीयू बेड।
- पहले जांच रिपोर्ट 10 से 12 दिनों में आ रही थी। अब 3 से 4 दिन लगते हैं।
- 300 से ज्यादा जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की भर्ती, मरीजों के इलाज के लिए।
एक्सपर्ट व्यू- अभी 13% आबादी संक्रमित
रायपुर की अभी केवल 13 प्रतिशत आबादी ही संक्रमित हुई है। लगभग 87 प्रतिशत आबादी संक्रमण से बची है। अभी चूंकि औसतन एक हजार मरीज रोज मिलते रहे हैं, इसलिए इसे ही पीक माना जा रहा है। भले ही तीन चार दिनों से केस कम आ रहे हैं, लेकिन इसे कमी नहीं माना जा सकता है। शहर के लोगों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
ओपी पंडा, टीबी एंड चेस्ट रोग विशेषज्ञ
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