कोरोना मरीजों के उपचार और ट्रेसिंग में अब भी लापरवाही जारी है। सिस्टम की ट्रेसिंग व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने और कोविड के इलाज के लिए चुने गए निजी अस्पताल बीमारी से लड़ने तैयार नहीं होने से शनिवार की रात एक मरीज की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग ने परिजनों को से-10 के 65 वर्षीय मरीज के संक्रमित होने की जानकारी तो दी लेकिन अस्पताल पहुंचाना भूल गया। 6 घंटे तक सिस्टम ने सुध नहीं ली तो परिजनों ने प्रशासन द्वारा चयनित निजी अस्पतालों से संपर्क साधा।
इस बीच चूंकि मरीज को आक्सीजन सेचुरेशन 97 से 84 पहुंच गया था इसलिए निवेदन के बाद भी तीन निजी अस्पताल उन्हें भर्ती करने को राजी नहीं हुए। समय बीतने के साथ ही मरीज की हालत भी नाजुक हो गई। देर रात करीब डेढ़ बजे परिजनों ने खुर्सीपार के अस्पताल से संपर्क किया। वहां के डॉक्टर मरीज को लेने राजी हो गए। पर दोपहर 12 बजे उसकी सुध नहीं ली। इस दौरान मौत हो गई।
इन 2 मामलों ने खोल दी सिस्टम की पोल, भर्ती होने लगाते रहे अस्पतालों के चक्कर
2 को रिपोर्ट आई, 4 को भर्ती, 6 को हो गई मौत: भागवत चौक, जामुल निवासी 23 वर्षीय मरीज की 2 सितंबर को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 48 घंटे बाद 4 सितंबर को विभाग ने जिले के कोविड अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया। 2 दिनों के इलाज के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन खुर्सीपार के अस्पताल में भर्ती किए। पेशेंट को सर्दी, खांसी और सांस लेने में तकलीफ थी। इस निजी अस्पताल में ही दौरान इलाज सुबह साढ़े 11 बजे मौत हो गई।
छह घंटे तक भटकते रहे, नहीं मिला इलाज: अहिवारा निवासी 32 वर्षीय फिमेल पेशेंट की रविवार को एंटीजेन टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन उसे सांस लेने में तकलीफ थी, इसलिए उसके पति उसे एंबुलेंस में लेकर 6 घंटे तक एक से दूसरे निजी अस्पताल भटकते रहे। आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव होती तो इलाज करते कह भर्ती से इंकार कर दिया। एक निजी कोविड अस्पताल राजी भी हुआ तो सीएमएचओ ऑफिस ने अडंगा डाल दिया।
सभी मरीजों का उपचार करना है: सीएमएचओ
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ने स्पष्ट किया कि कोविड मरीजों के इलाज के लिए चयनित 6 में से 5 निजी अस्पताल कोविड और नान कोविड, दोनों प्रकार के मरीजों का इलाज कर सकते हैं। केवल जुनवानी का मित्तल अस्पताल ही कोविड पेशेंट के लिए रिजर्व किया गया है।
3 दिनों बाद रिपोर्ट आई फिर भी सक्रिय नहीं हुए
से-10 के इस पेशेंट की रिपोर्ट सैंपल देने के तीन दिनों बाद आई, तब भी सिस्टम मरीज की हालत नाजुक होने से पहले इन्हें इलाज शुरू नहीं करा पाया। जबकि कलेक्टर के मुताबिक मरीजों को क्विक इलाज दिलाने के लिए 24 अतिरिक्त टीमों के साथ ही रिस्पांस टीम बनाई है।
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