संभाग में बुधवार देर शाम तक 255 नए कोरोना मरीज मिले हैं। बताया जा रहा है देर रात तक आंकड़ों में और बढ़ोतरी होगी। समाचार लिखे जाने तक सबसे ज्यादा 76 मरीज दंतेवाड़ा में मिले हैं। इसके अलावा कांकेर में 75, सुकमा में 28, नारायणपुर में 23, कोडागांव में 27 और बस्तर जिले में 26 नए पॉजिटिव मिले हैं।
मेडिकल कॉलेज में बुधवार को इलाज के दौरान दो लोगों ने दम तोड़ दिया है दोनों ही कोरोना पॉजिटिव थे। इसके अलावा सुकमा जिले के दोरानापाल में रहने वाली एक वृद्धा की मौत के बाद उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। पिछले 24 घंटे में तीन मौतें कोरोना से हो गई इनमें दो ने मेकॉज में दम तोड़ा। इनमें से एक मरीज ओडिशा के जयपुर में रहने वाला 41 वर्षीय युवक है तो वहीं दूसरा सीआरपीएफ 150 वीं बटालियन का एसआई है।
मिली जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ 150वीं बटालियन का जवान सुकमा में तैनात था उसे गंभीर अवस्था में मेकॉज में भर्ती करवाया गया था। यहां मौत के बाद पता चला कि जवान कोरोना पॉजिटिव है। इसी तरह जयपुर ओडिशा का युवक दो दिन से मेकॉज में भर्ती था। इसी बीच उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और उसने भी दम तोड़ दिया। पिछले 24 घंटे में तीन कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो गई। ओडिशा के जयपुर के जिस युवक की मौत हुई है उसका और सीआरपीएफ जवान का अंतिम संस्कार जगदलपुर में ही किया जाएगा। इसके अलावा दोरानापाल में वृद्वा की मौत के बाद अब उसके घर के आसपास के इलाके को सैनिटाइज करवाया जा रहा है और उसके संपर्क में आने वाले लोगों का कोरोना चेकअप करवाया जा रहा है।
बड़ी चुनौती...क्योंकि ओडिशा से भी आ रहे मरीज
इधर इलाज के लिए अब सीमावर्ती राज्य ओडिशा के मरीज भी मेकॉज आने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह में ओडिशा से चार से ज्यादा पॉजिटिव मरीज मेकॉज में इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से दो की मौत हो गई है। डाॅक्टरों का कहना है कि अभी बस्तर संभाग के मरीजों का इलाज करने में ही अच्छी खासी मशक्तत करनी पड़ रही है। इस बीच ओडिशा से भी पॉजिटिव केस आने के बाद यहां पॉजिटिव होकर आने वालों की संख्या में ज्यादा इजाफा होगा। पहले से ही बस्तर के मरीजों के इलाज के लिए डाॅक्टरों और साधनों की कमी है हालांकि डाॅक्टर कह रहे हँ कि मानवीय द़ृष्टिकोण को देखते हुए मेकॉज पहुंचने वाले सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है चाहे वह किसी भी प्रदेश का हो, लेकिन इलाज के दौरान मौत के बाद ओडिशा सरकार या ओडिशा के अफसरों की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है ऐसे में परेशानी और बढ़ रही है।
रोज 14 सौ सैंपल जांचने की क्षमता फिर भी 5 दिन बाद आ रही रिपोर्ट
जिले में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग और मेकॉज का अमला कितना गंभीर है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट तीन से पांच दिनों बाद आ रही है। कुछ मामले तो ऐसे हैं जिनमें संदिग्धों को आठ दिन बाद भी पता नहीं चल पा रहा है कि वे पॉजिटिव हैं या निगेटिव।
मेकॉज के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में हर दिन 14 सौ सैंपल के कोरोना टेस्ट करने की क्षमता है। चूंकि अभी कोरोना की जांच के लिए सबसे विश्वनीय आरटीपीसीआर जांच को माना जा रहा है। ऐसे में लोग बड़ी संख्या में आरटीपीसीआर जांच करवा रहे हैं लेकिन माइक्रोबायोलॉजी लैब से संदिग्ध मरीजों को जांच रिपोर्ट तीन से पांच दिनों बाद मिल रही है। यह देरी क्यों हो रही है इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
होम आइसोलशेन वालों को 4 दिन बाद मिल रही दवा
इधर आरटीपीसीआर से पॉजिटिव आने वाले मरीजों को उसी दिन हॉस्पिटल या कोविड सेंटर में भर्ती नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा जो व्यक्ति होम आइसोलेट हो रहे हैं उन्हें भी दवा तीन से चार दिन बाद मिल रही है। शहर के शिवमंदिर वार्ड में तीन दिन पहले एक पत्रकार एंटीजेन किट से पॉजिटिव निकले। पत्रकार के पॉजिटिव होने के बाद तीन दिन तक न तो उन्हें दवा दी गई, न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य की जांच की गई। अब पत्रकार का पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव निकल गया है। कई स्थानों पर शिकायत करने के बाद बुधवार को पत्रकार को दवा उपलब्ध हो पाई है। अभी भी उनके बच्चों के लिए दवा उपलब्ध नहीं हुई है।
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