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शहर के अलग-अलग श्मशानघाटों और कब्रिस्तान में 22 युवाओं की टीम लगी, पूरी परंपरा और रीतिरिवाजों से अंतिम संस्कार कर रहे

राजधानी में कोरोना मृतकों की संख्या लगातार बढ़ी है और शुरू में इनका अंतिम संस्कार बड़ी चुनौती थी, लेकिन कुछ नौजवानों ने इस काम के लिए भी खुद आगे आकर बड़ी मिसाल पेश कर दी है। शहर के अलग-अलग श्मशानघाटों और कब्रिस्तान में ऐसे 22 युवाओं की टीम लगी है, जो कोरोना मृतकों का पूरी परंपरा और रीतिरिवाजों से अंतिम संस्कार कर रही है, वह भी बिना किसी दिखावे के खामोशी से।

निगम अफसरों के मुताबिक इन युवाओं ने खुद ही फोन कर इस काम की इच्छा जताई थी। प्रशासन केवल इनके हाईजीन और संक्रमित न होने का ही खयाल रख रहा है, बाकी सारा काम इन युवाओं का हौसला ही कर रहा है।
अफसरों ने बताया कि कई युवा इंसानियत से जुड़े इस काम में शामिल होने की इच्छा जता रहे थे।

इनमें से 22 लोगों की टीम को अलग-अलग स्थानों पर अंतिम संस्कार का जिम्मा सौंपा गया है और ये इस जिम्मेदारी को बड़ी शिद्दत के साथ निभा रहे हैं। दरअसल अगस्त के मध्य से शहर में कोरोना मृत्यु के मामले बढ़ रहे हैं। औसतन दस से पंद्रह मौतें रोजाना हो रही है। नगर निगम ने देवेंद्र नगर, नवा रायपुर अटल नगर, मौदहापारा कब्रिस्तान और गोंदवारा में कोविड मृतकों के अंतिम संस्कार की जगह निर्धारित की है।

कोविड अंतिम संस्कार के लिए शुरू में निगम के नियमित कर्मचारी नियुक्त हुए थे। लेकिन अब देवेंद्र नगर श्मशानघाट में 4, नवा रायपुर में 8, मौदहापारा कब्रिस्तान में 5 और गोंदवारा श्मशान में 5 युवाओं की टीम इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है।

एक दिन में ही अस्थियां
अंतिम संस्कार के मामले में नोडल अफसर उमेश नामदेव के मुताबिक इन टीमों को सुरक्षा देना सबसे प्राथमिक काम है। टीम की सुरक्षा और हाइजीन के लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है। समय-समय पर कोविड टेस्ट भी करवा रहे हैं। ज्यादातर युवा हैं जो खुद इस काम को करने आगे बढ़कर सामने आए हैं। फिलहाल गोंदवारा में अंतिम संस्कार के दौरान कोई पुजारी नहीं रहता है। आमतौर पर तीन दिन बाद अस्थियां उठाने का रिवाज रहता है, लेकिन बढ़ती हुई मौतों के कारण एक दिन बाद ही परिजनों को अस्थियां दी जा रही है।

कई युवाओं के फोन
जोन-2 के नोडल अफसर रवि लावनिया के मुताबिक अंतिम संस्कार करने वाले सभी युवा इंसानियत के जज्बे से ओतप्रोत हैं। इनमें अलग-अलग धर्मों के लोग हैं, ताकि हर कोरोना मृतक का पूरे सम्मान और रीतिरिवाज से अंतिम संस्कार हो सके। जैसे-जैसे मृतकों की संख्या बढ़ रही है, और युवा भी निगम अफसरों को फोन कर इस काम में रुचि जताने लगे हैं। जहां तक अभी अंतिम संस्कार में लगे युवाओं का सवाल है, पूरे हौसले के साथ वे सभी सुरक्षित हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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