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पहले 18000 अब 30 हजार में बेच रहे रेत अफसरों ने भी कार्रवाई से पल्ला झाड़ा, कीमत कब और कैसे कम होगी इसके लिए कोई प्लान नहीं

राजधानी में पहली बार ऐसा हो रहा है जब एक हाइवा रेत के लिए 30 से 32 हजार रुपए की वसूली की जा रही है। अगस्त के आखिर में एक हाइवा रेत 16 से 18 हजार में बिकी, लेकिन अब इसी रेत की कीमत दोगुना हो गई है। सरकारी दस्तावेजों में रेत घाट बंद हैं और रेत संग्रहण केंद्रों से रेत की सप्लाई की जा रही है। लेकिन फील्ड में मामला ही उल्टा है। रेत घाट हो या रेत संग्रहण केंद्र सभी जगहों पर रेत माफियाओं का कब्जा हो गया है।

एक खास सिंडीकेट ने इस पर कब्जा कर लिया है। सिंडीकेट में शामिल लोग राज्य के दो मंत्री और कुछ रसूखदार नेताओं के खास हैं। इस वजह से इन पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
जिले में ऐसी कोई भी जगह नहीं है जहां पिट पास के साथ रेत की सप्लाई हो रही है। रेत माफिया अपनी कीमत पर रेत की लोडिंग करवाते हैं और बिना पिट पास के ही गाड़ियां गांवों से निकल रही है।

इसकी शिकायत कई बार गांव वालों के साथ ही रेत परिवहन संघ और सप्लायरों ने की। लेकिन खनिज विभाग के अफसर यह कहकर मामला टाल देते हैं कोरोना की वजह से अफसर वर्क फ्रॉम होम हैं। स्थिति सामान्य होने पर ही फील्ड में जाकर जांच होगी। कोरोना की इस स्थिति का फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं। सप्लायरों को चेतावनी दी गई है कि रेत लेना है तो इसी कीमत पर ही खरीदना होगा।

क्रेडाई नाराज, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
रेत की लगातार बढ़ती कीमतों से बिल्डर भी नाराज हो गए हैं। क्रेडाई ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है। उसका दावा है कि रेत की कीमत बढ़ने का असर कंस्ट्रक्शन साइट पर हो रहा है। निर्माण लागत बढ़ने की वजह से मकानों की कीमत बढ़ानी पड़ेगी। इसकी वजह से आम लोगों को भी ज्यादा कीमत पर मकान खरीदना पड़ेगा। रेत महंगी होने की वजह से निजी मकान बनना भी बंद हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि तीन गुना कीमत में रेत खरीद नहीं सकते हैं।

सप्लायरों ने भी खड़ी की गाड़ियां
राजधानी के अधिकतर सप्लायरों ने अपने स्टाफ को छुट्टी देकर गाड़ियां खड़ी कर दी हैं। उनका कहना है कि इतनी कीमत पर रेत की सप्लाई नहीं कर सकते। महंगी कीमत पर रेत खरीदेंगे तो आम लोगों तक पहुंचाएंगे कैसे। जिला खनिज विभाग के सभी अफसरों से इसकी शिकायत की गई, लेकिन अभी तक उनकी एक भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की सभी बातों की जानकारी होने के बावजूद कोई भी अफसर इस पर कार्रवाई नहीं करना चाह रहे हैं।

^रेत घाटों का संचालन एक तय कीमत पर ही किया जा सकता है। रेत संग्रहण केंद्रों से मनमानी कीमत कैसे वसूल की जा रही है इसकी जांच की जाएगी। बिना पिट के गाड़ियां मिली तो अफसरों पर भी कार्रवाई तय है।
- डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर



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सरकारी दस्तावेजों में रेत घाट बंद हैं, पर हर जगह रेत माफियाओं का कब्जा है।


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