अब कोरोना मरीजों से निजी अस्पताल इलाज के नाम पर वसूली नहीं कर पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज की दरें तय कर दी हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने इससे संबंधित आदेश जारी किया। दरों का निर्धारण मरीज की स्थिति (सामान्य, गंभीर, आईसीयू व अतिगंभीर), अस्पताल की मान्यता और राज्य के जिलों को तीन श्रेणी में बांटकर किया गया है।
रोज एक मरीज से अधिकतम 18 हजार ही इलाज का खर्च ले पाएंगे। अस्पतालों को नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड ऑफ हॉस्पिटल्स एंड हेल्थ केयर से मान्यता प्राप्त और बिना एनएबीएच वाले कैटेगरी में बांटा गया है। इधर, एसो. ऑफ हेल्थ प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष योगेश गंभीर ने कहा है कि सरकार द्वारा निर्धारित दर मानी जाएगी। दिक्कत होने पर सरकार से बात होगी।
जानिए...मरीजों का बंटवारा कैसे किया गया
सामान्य मरीज- जिनमें कोई लक्षण नहीं है। नॉर्मल वार्ड में भर्ती।
मॉडरेट-लक्षण वाले सामान्य मरीज, जिन्हें ऑक्सजीन सपोर्ट मिला।
सीवियर- आईसीयू में भर्ती मरीज, मगर वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं।
अति गंभीर- आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट मरीज।
अब तक क्या हाेता था...रोज 60 हजार रुपए तक वसूली
आईसीयू में भर्ती मरीजों से प्रतिदिन 40 से 60 हजार रुपए लिए जा रहे थे। जबकि सामान्य मरीजों से प्रतिदिन 10 से 25 हजार रुपए वसूले जा रहे थे।
टेस्ट की भी दर निर्धारित
ईसीजी के लिए 300 रुपए और ब्लड शुगर के 100 रुपए
4000 रु. सामान्य मरीज को लगेंगे न्यूनतम
5500 रु. सामान्य मरीज को लगेंगे रांची में
एबीजी 400 रु.
ब्लड शुगर 100 रु.
डी-डाइमर 800 रु.
हेमोग्राम 800 रु.
सीटी-चेस्ट 500 रु.
एक्स-रे चेस्ट 500 रु.
ईसीजी 300 रु.
आदेश में कहा गया है कि निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के प्रतिदिन किए जानेवाले सामान्य टेस्ट निर्धारित दर पर ही किए जाएंगे। हालांकि 90 प्रतिशत मामलों में कुछ टेस्ट और इलाज लगातार होते हैं। जिसके लिए अधिकतम दर तय की गई है। यह दर कोरोना मरीजों पर ही लागू होगी। यह दर नीति आयोग द्वारा निर्धारित एवं अन्य राज्यों में लागू दर के आधार पर तय किया गया है। यह अधिकतम दर है, इससे कम दर पर इलाज करने हेतु अस्पताल स्वतंत्र हैं।
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