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Jharkhand daily news

गिरिडीह जिले में जमीन का फर्जीवाड़ा कोई नया नहीं है। यहां हर कदम पर जमीन का अवैध खेल चल रहा है। खासकर शहर व आसपास में की खाली जमीन पर धंधेबाजों की नजर पड़ जाए तो फिर फर्जी दस्तावेज के माध्यम से उसकी हेराफेरी किया जाना आम बात हो चुकी है। सरकार का गैरजमरूआ जमीन हो या फिर रेलवे अथवा पीडब्लूडी की अधिग्रहित जमीन धंधेबाज आराम से फर्जी दस्तावेजों के सहारे पूरा खेल करने में सफल हो रहे हैं।

हालांकि ऐसे कुछ मामले उजागर भी हुए, उस पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे भू-माफियों को कठोर सबक मिले। लिहाजा जमीन का फर्जीवाड़ा यहां सर चढ़कर बोलने लगा है। इधर कुछ दिनों से गिरिडीह जिले में सीएनटी कानून को विलोपित कर जमीन की खरीद बिक्री का नया खेल चालू हुआ है। जिसमें धंधेबाज सीएनटी की जमीन को खरीद-बिक्री करने के लिए सीएनटी रैयत के के केवाला को पहले गौण कर देते हैं और फिर मूल दस्तावेज खतियान के सहारे उक्त जमीन की खरीद-बिक्री करने का खेल कर रहे हैं।

गिरिडीह अंचल में ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले आ चुके हैं। जिस पर गहन पड़ताल की जा रही है और कई धंधेबाजों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही सिरसिया मौजा के एक मामले में गिरिडीह सीओ की ओर से कार्रवाई की भी अनुशंसा की जा चुकी है। जिसका विविध वाद संख्या 06/2020-21 फिलहाल एलआरडीसी कोर्ट में लंबित है। जिसमें जांच रिपोर्ट के साथ अंचल अधिकारी ने उक्त जमाबंदी को रद्द करते हुए संबंधित भूमिहीन सीएनटी रैयत को भू वापसी की अनुशंसा की है। विदित हो कि उक्त जमामबंदी अनिता उपाध्याय के नाम पर कायम है, जो पंजी-2 के जिल्द 12 पृष्ठ संख्या 28 पर दर्ज मौजा सिरसिया, थाना नंबर 44, खाता नंबर 29, प्लॉट नंबर 224, रकबा 66 डिसमिल है।

ऐसे मामलों की चल रही है जांच : सीओ
गिरिडीह के सीओ रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि सीएनटी को विलोपित कर जमीन खरीद-बिक्री करने का कई मामला आया है। जिसकी जांच चल रही है। अनिता उपाध्याय के नाम से जो 66 डिसमील की जमाबंदी कायम है, वह चमार जाति की जमीन है, जो सीएनटी के दायरे में आता है। लिहाजा उक्त जमीन भू-स्वामी को वापसी की अनुशंसा की गई है।



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