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Jharkhand daily news

पुलिस के अभियानों और कोरोना महामारी की वजह से नक्सली आर्थिक रूप से कमजाेर हाे गए हैं। लॉकडाउन से उपजी परिस्थितियों के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भाकपा माओवादी सहित अन्य नक्सली संगठन सक्रिय हुए हैं। पुलिस कार्रवाई की वजह से भी भाकपा माओवादी और दूसरे उग्रवादी संगठन बैकफुट पर चले गए थे।

बड़े नेताओं ने भाकपा माओवादी संगठन काे फिर से मजबूत बनाने, क्षेत्र में पहले की तरह दहशत फैलाने, लेवी वसूली का दायरा बढ़ाने और पुलिस के सूचना तंत्र काे कमजाेर बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए विस्तृत याेजना बनाई है।

शहादत सप्ताह (27 जुलाई से 3 अगस्त) के दाैरान माओवादियाें ने क्षेत्र में अपनी नई याेजना के तहत ही काम करना शुरू कर दिया है। चतरा और हजारीबाग जिले से टीपीसी काे भगाकर, लेवी वसूली बढ़ाने के उद्देश्य से माओवादी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

गणपति के बाद नबंल्ला केशव राव संगठन का सुप्रीमो बनने के बाद से चतरा, लातेहार, हजारीबाग जिलों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग खुद कर रहा है। प्रतिद्वंद्वी टीपीसी की वजह से चतरा में भाकपा माओवादी कमजोर पड़ गया था। राज्य की सुरक्षा एजेंसी ने हजारीबाग, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला जिला पुलिस बल काे अलर्ट किया है।

कहां, किसने संभाला मोर्चा...
शहादत सप्ताह के दौरान नक्सलियों ने पोस्टरबाजी कर लगभग सभी जिलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। जिन क्षेत्रों में कमजोर पड़ने की वजह से लेवी वसूली में परेशानी आती थी, वहां संगठन द्वारा विशेष तैनाती की गई है। हजारीबाग, चतरा और गया बॉर्डर पर माओवादी रीजनल कमेटी सदस्य इंदल गंझू और आलोक दस्ता को कमान सौंपी गई है। वहीं पलामू, औरंगाबाद, गया के अलावा चतरा बॉर्डर पर सैक सदस्य संदीप, संजीत व विवेक के दस्ते काम शुरू कर चुके हैं।

अपना अस्तित्व बचाने के लिए टीपीसी भी सक्रिय...
चतरा और हजारीबाग में अपना अस्तित्व बचाने के लिए टीपीसी के सदस्य भी सक्रिय हाे गए हैं। जाे संगठन के बड़े नेता कोहराम, आक्रमण और बिंदु गंझू आदि की गिरफ्तारी के बाद फरार हाे गए थे। बताया है कि कभी भी भाकपा माओवादी और टीपीसी के बीच घमासान हाे सकता है। रांची से सटे खलारी व बुढ़मू में माओवादियों की धमक शुरू हो गई है। यहां टीपीसी का वर्चस्व रहा है।

सूचना तंत्र कर रहे मजबूत...
कमाई को लेकर कई नक्सली संगठन आपस में ही एक-दूसरे के मुखबिरों को मौत के घाट उतार रहे हैं। इन दिनों भाकपा माओवादी सहित अन्य नक्सली संगठन अपने मुखबिरों की संख्या बढ़ाने में लगे हुए हैं। जिससे लेवी वसूली की जानकारी ज्यादा से ज्यादा हासिल हो सके। पुलिस सहित अन्य की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। नक्सली संगठन पुलिस बल को मिलने वाले लोकल इनपुट को ब्रेक करने में जुट गए हैं, ताकि पुलिस तक सूचना न पहुंचे।

पीएलएफआई के कई नक्सली रांची में सक्रिय

पीएलएफआई नक्सलियों ने राजधानी रांची के आसपास अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। नामकुम, टाटीसिल्वे, अनगड़ा, सिल्ली के इलाके में संगठन में नए लोगों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगार युवकों को झांसे में लेकर पीएलएफआई का सदस्य बनाया जा रहा है। पीएलएफआई के अखिलेश गोप, तुलसी पाहन आदि नक्सली राजधानी रांची में सक्रिय हैं।



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Fear of infighting between Maoists and TPC over levy collection


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