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Jharkhand daily news

मुकेश सिंह चौहान, टेबुल पर नरमुंड, कंकाल और सामने बैठे इंसान को देखकर ये न सोचंे कि दृश्य किसी तंत्र साधना केंद्र का है और सामने कोई तांत्रिक बैठा है। असल में यह कोल इंडिया के सीसीएल कथारा क्षेत्र का सिविल ऑफिस है... यहां बैठते हैं स्टाफ ऑफिसर (सिविल) रंजन कुमार प्रधान। इस दफ्तर में हर काम नरमुंड और कंकाल के इशारों पर होता है। प्रधान कहते हैं-नरमुंड और कंकाल रखना अंधविश्वास नहीं है।

ये आस्था-अध्यात्म का सवाल है। ऑफिस में नरमुंड रखना चाहिए, उनसे पूछे जाने पर जवाब मिला- क्या बुराई है इसमें। मैं इस पर रिसर्च कर रहा हूं। ज्यादा जानकारी चाहिए तो फुर्सत में मेरे साथ बैठिए। जनवरी 2019 में प्रधान ने कथारा एरिया ज्वाइन किया था। कुछ दिनों के बाद ही ऑफिस के टेबल पर नरमुंड, कंकाल, चूड़ी, सिंदूर, आइना, कंघी सज गए। श्मशान सा दिखने वाला देश का यह पहला सरकारी या निजी कंपनियों का ऑफिस होगा।



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ऑफिसर का अंधविश्वास: ये आस्था-अध्यात्म है... इस पर तो मैं शोध भी कर रहा हूं


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