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Jharkhand daily news

कोरोना काल के चार माह से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठप है। मैट्रिक-इंटर बोर्ड के 6.82 लाख बच्चों के लिए डिजिटल कंटेंट या दूरदर्शन से पढ़ाई की अवधारणा सफल नहीं हो रही। क्योंकि शिक्षा विभाग ने व्यवस्था तो शुरू कर दी, लेकिन स्मार्ट फोन नहीं होने से डिजिटल कंटेंट 74 प्रतिशत बच्चों तक नहीं पहुंच रहा। जिन 26 प्रतिशत बच्चों को कंटेंट मिल भी रहा है तो अधिकतर इसे समझ नहीं पा रहे। किताब तो है, लेकिन गाइड करने वाला कोई नहीं।

ज्यादातर अभिभावक किसान, मजदूर हैं या फिर छोटे कारोबारी, जो साक्षर भर हैं। उच्च शिक्षा की किताबें अपने बच्चों को पढ़ा नहीं सकते। छात्र-छात्राओं की स्थिति अत्यधिक विषम हो चुकी है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि अगले साल बोर्ड की परीक्षा देने वाले हैं तो वे क्या पढ़ें, किससे पढ़ें? पढ़ाई से जुड़े सवालों का हल समझने किसके पास जाएं?

इधर, पाठ्यक्रम को लेकर भी संशय बना हुआ है। महकमे के अधिकारी कह रहे हैं कि सितंबर में पाठ्यक्रम कम किया जाएगा। लेकिन कितना कम होगा, कौन-कौन से पाठ छोटे किए जाएंगे, इस बारे में स्पष्ट जानकारी देने वाला कोई नहीं है। वस्तुस्थिति यह है कि ज्यादातर स्टूडेंट पढ़ाई से खुद को अलग करते जा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने विभिन्न जिलों के 1400 बच्चों से बातचीत कर जमीनी सच्चाई जानी तो सिस्टम की लापरवाही उजागर हुई।

रांची : गणित, विज्ञान, अंग्रेजी पढ़ नहीं पा रहे

हिनू यूनाइटेड उच्च विद्यालय, एसएस डोरंडा गर्ल्स स्कूल के बच्चों ने कहा कि डिजिटल कंटेंट या दूरदर्शन से पढ़ाई का उन्हें विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। समाज अध्ययन और हिंदी को छोड़ दें तो गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषयों की पढ़ाई कर ही नहीं पा रहे हैं। डिजिटल कंटेंट भी समझ से परे है।

रामगढ़ : एंड्राएड मोबाइल है नहीं, कैसे करेंगे पढ़ाई

दुलमी प्रखंड के चटाक उत्क्रमित उच्च विद्यालय की कक्षा 10वीं की छात्रा निशा कुमारी ने बताया कि ऑनलाइन क्लास तो हो रही है, पर एंड्राएड फोन नहीं होने से कक्षाएं नहीं कर पाती हूं। सिलेबस के आधार पर पढ़ाई भी पूरी नहीं हो पाई है। बिजली गुल रहने के कारण दूरदर्शन की कक्षाएं भी पूरी नहीं कर पा रही।

गढ़वा : इंटरनेट स्लो है, 2 घंटे ही बिजली रहती है

10वीं के छात्र दीपक कुमार ने कहा कि ऑनलाइन स्टडी के दौरान पूरी तरह से टॉपिक समझ में नहीं आ पाता है। इंटरनेट स्लो रहने व सिर्फ दो घंटे बिजली रहने के कारण मोबाइल चार्ज नहीं हो पाता है। इससे समय पर ऑनलाइन क्लास से नहीं जुड़ पाता हूं। अक्सर कक्षाएं मिस हो जा रही हैं।

सबके बस अपने अपने सवाल!

छात्र

1. पढ़ाई का नया साधन बना स्मार्ट फोन अधिकतर के पास नहीं।
2. सबको डिजिटल कंटेंट नहीं मिलता।
3. कंटेंट समझाने वाला कोई नहीं।
4. बिजली नहीं रहने से दूरदर्शन पर हो रही पढ़ाई में शामिल नहीं हो पा रहे।

शिक्षक

1. स्कूल में रोटेशन के आधार पर जाते हैं पर छात्रों का स्कूल में आना मना।
2. गांवों में पढ़ाई का कॉन्सेप्ट सफल नहीं, बच्चों के घर तक जाना संभव नहीं।
4. शिक्षा मंत्री के आग्रह के बावजूद गांव-गांव जाने से संक्रमण का भय।

विभाग

1. मैन पावर कम, कामों की प्रगति में बाधा।
2. डिजिटल कंटेंट बनाने और भेजने के बाद भी उसका अपेक्षित लाभ नहीं।
3. मंत्री-अफसरों में कम्यूनिकेशन का अभाव।
4. पाठ्यक्रम संशोधन या अन्य कार्यक्रम बनाने में हो रहा विलंब।

अभिभावक बोले-गरीब हैं, मोबाइल कैसे खरीदें, रिचार्ज कैसे कराएं

मेरी बेटी सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती है। रोज पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदने को कहती है, लेकिन हम गरीब हैं। लॉकडाउन से आर्थिक स्थिति खराब है। मोबाइल खरीदना और 500 रुपए का रिचार्ज करना संभव नहीं है। बेटी कभी-कभार चाचा से मोबाइल लेकर पढ़ाई करती है। -नंदकिशोर महतो, दुलमी प्रखंड, रामगढ़

जेईपीसी ने कहा-सितंबर तक पाठ्यक्रम पर ले लिया जाएगा निर्णय

यह सही है कि अब तक इन बच्चों के पाठ्यक्रम के बारे में निर्णय नहीं लिया गया है। उम्मीद है कि सितंबर में निर्णय ले लिया जाएगा। मैट्रिक-इंटर के बच्चों पर विशेष फोकस की योजनाएं बना रहे हैं। डिजिटल कंटेंट भेजा जा रहा है। आनेवाले समय में बेहतर रिजल्ट सामने आएंगे। -शैलेश चौरसिया, राज्य परियोजना निदेशक, जेईपीसी



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यह है गढ़वा का छात्र रोहित कुमार, घर में स्मार्ट फोन नहीं है, इसलिए दोस्त के घर जाकर एंड्रायड फोन से पढ़ाई कर रहा है।


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