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Jharkhand daily news

जाने-माने उर्दू शायर राहत इंदौरी नहीं रहे। अपनी बेबाक शायरी से युवा से लेकर बुजुर्ग के दिलों को छूने वाले राहत इंदौरी शहर में 4 से ज्यादा बार आए थे। 26 अक्तूबर 2018 को स्टील द्वारा धातकीडीह में आयोजित मुशायरे में खुले मैदान में अपनी शायरी से लोगों का दिल जीत लिया था। मुशायरे में उन्हें सुनने वाले लोग उनकी शायरी को आज भी याद करते हैं।

शहर के युवाओं से कहा था कि जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, बारिश में पतंगें उड़ाया करो.. उस मुशायरे की महफिल में असर भागलपुरी, ताबा वास्ती, शादाब आजमी, सुफील शाही के साथ राहत इंदौरी के पुत्र अल्ताफ जिया व शहर के मुश्ताक अहजन भी शामिल हुए थे। वे एनआईटी जमशेदपुर में वार्षिक समारोह में हिस्सा लेने भी आए थे। इसके अलावा राहत इंदौरी 24 फरवरी 2018 को साकची रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में और 25 मई 2018 को शिरकत करने पहुंचे थे।

26 अक्टूबर 2018 को धातकीडीह में शायरी से दिल जीत लिया था

ऊगलियां न यूं न सब पर उठाया करो
खर्च करने से पहले कमाया करो
ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे बारिशों में पतंगें उड़ाया करो।
जी हां जिदंगी के फलसफे को राहत इंदौरी ने कुछ ऐसे ही जमशेदपुर में निवासियों को समझाया था। मौका था 2018 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी के कार्यक्रम का।

फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क हो भरपूर होना चाहिए।
2018 में अखबारों के कार्यक्रम में आने के दौरान उन्होंने कहा था कि -
सब की पगड़ी को हवाओं में उछाला जाए
सोचता हूं कोई अखबार निकाला जाए।
पीके जो मस्त है उनसे तो कोई खौफ नहीं
पीके जो होश में है उनको संभाला जाए



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टाटा स्टील के मुशायरा कार्यक्रम के दौरान डाॅ. राहत इंदौरी।


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