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दो दुकानों में महंगी यूरिया बिक रही थी, कार्रवाई की भनक लगते ही बाकी दुकानदार हुए गायब

परलकोट क्षेत्र में यूरिया खाद की कालाबाजारी को लेकर भास्कर ने 18 अगस्त को खबर प्रकाशित की थी। जिस दिन खबर प्रकाशित हुई उस दिन व्यापारियों ने सावधानी बरती लेकिन अगले ही दिन से फिर कालाबाजारी शुरू कर दी। कृषि विभाग इसी मौके की तलाश में था। विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई करते बांदे तथा संगम में व्यापारियों को 266 रुपए वाली यूरिया खाद 390 तथा 370 रुपए में बेचते रंगे हाथों पकड़ा। इस कार्रवाई की भनक एक बार फिर व्यापारियों को लग गई जिसके चलते बहुत से व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर गायब हो गए।
परलकोट क्षेत्र में किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते व्यापारियों ने यूरिया की कृत्रिम किल्लत कालाबाजारी शुरू कर दी थी। यूरिया का निर्धारित मूल्य 266 रुपए प्रति बोरी है जिसे 400 रुपए प्रति बोरी तक बेचा जा रहा था। इसे लेकर भास्कर ने खबर प्रकाशित की। पखांजूर में देवनाथ एजेंसी में छापा मारने के अलावा बांदे तथा संगम में कई खाद दुकानों में विभाग ने छापे मारे। बांदे स्थित संजय फर्टीलाइजर में किसानों को 390 रुपए की दर से यूरिया बेचते रंगे हाथ विभाग ने दुकानदार को पकड़ा। किसानों के बयान लिए गए और खाद वापस करा दुकान से पैसे भी वापस कराए गए। इसके अलावा संगम स्थित जयप्रकाश कृषि सेवा केंद्र में भी व्यापारी द्वारा किसानों को 370 रुपए में यूरिया बेचते पकड़ा गया। विभाग ने इन दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करते खाद भंडारण और विक्रय पर रोक लगा दी।

खाद का व्यापार निजी दुकानों के भरोसे
निजी दुकानदार न सिर्फ यूरिया बल्कि अन्य खादों को भी निर्धारित दर से कहीं अधिक दाम पर बेचते हंै। पांच वर्ष पहले तक लैंप्साें में लोन लेने वाले किसानों के अलावा खाद की नगद बिक्री भी होती थी। अब तो लैंप्स में नगद में खाद बिक्री बंद कर दिए जाने से किसानों को खाद निजी दुकानों से ही खरीदना पड़ता है जहां उनसे अधिक दाम वसूले जाते हैं।



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