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सिर्फ प्रांत टोली से मिलेंगे भागवत, संघचालकों और भाजपा संगठन महामंत्री को बदलने पर होगी बात

आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 15 व 16 अगस्त को राजधानी प्रवास पर रहेंगे। उनसे छत्तीसगढ़ व महाकौशल प्रांत टोली के पदाधिकारी ही मिल पाएंगे। कोरोना की वजह से फुल हाउस मीटिंग नहीं होगी। यानी भाजपा समेत अन्य आनुषांगिक संगठनों को नहीं बुलाया जाएगा। हालांकि छत्तीसगढ़ में संघ की आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। इसमें भाजपा को संगठनात्मक रूप से मजबूती देने पर भी बात होगी। चर्चा है कि भाजपा में खेमेबाजी को दूर करने के लिए संगठन महामंत्री को बदला जा सकता है। हालांकि संघ के पदाधिकारी अभी ऐसी किसी बात से इंकार कर रहे हैं। भागवत 15 अगस्त की शाम को रायपुर पहुंचेंगे।
जागृति मंडल या रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में 16 अगस्त को पूरे दिन छत्तीसगढ़ व महाकौशल प्रांत की बैठक होगी। इसमें प्रांत प्रचारक, प्रांत कार्यवाह, सह कार्यवाह आदि अपनी रिपोर्ट देंगे। जो लक्ष्य तय किए गए थे, उसकी रिपोर्ट देने के अलावा भविष्य के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। हाल ही में राज्य सरकार ने गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर खरीदी शुरू की है। आरएसएस इससे पूरी तरह सहमत नहीं है। इसकी कमियों को सामने लाने के लिए आरएसएस द्वारा अभियान शुरू किया जा सकता है। इसी कड़ी में भाजपा के भविष्य को लेकर भी रणनीति पर बात की जाएगी। दरअसल, राज्य में 15 साल की सत्ता के बाद विपक्ष में बैठी भाजपा में खेमेबाजी के कारण काफी गिरावट आई है।
माता कौशल्या के मंदिर की दुर्दशा पर कहें - तिवारी : कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने आरएसएस प्रमुख के दौरे से पहले उनसे सवाल पूछा है कि वे लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा करते हैं परंतु कभी भी माता कौशल्या के मंदिर की दुर्दशा पर कुछ नहीं कहा। सालों-साल से माता के मंदिर के गर्भगृह में ताला लगा कर रखा गया था।

संघ प्रमुख को प्रदेश की जनता को यह भी बताना चाहिए कि पिछले 15 सालों से संघ समर्थित और संघ के स्वयंसेवक पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह की सरकार थी उसके बावजूद भगवान राम के वन पथ गमन के मार्गों को और उसमें आने वाले पवित्र स्थलों को क्यों नहीं संवारा गया?

सितंबर में आ सकते हैं सर कार्यवाह भैयाजी जोशी
इस साल आरएसएस में प्रांत संघ चालक, विभाग व क्षेत्र संघ चालक, कार्यवाह आदि के चुनाव होने हैं। सर संघ चालक प्रवास में इसकी रूपरेखा तय की जाएगी। फिलहाल आंतरिक रूप से कुछ प्रचारकों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं। इसके बाद सितंबर में सर कार्यवाह भैयाजी जोशी की मौजूदगी में चुनाव की प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि कोरोना के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।



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