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आदिवासी समाज ने बूढ़ा देव को नई फसल अर्पित कर मनाया पर्व

अंचल में आदिवासी समाज द्वारा नवाखाई का महापर्व गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दूसरे दिन 28 अगस्त को ठाकुर जोहारनी का आयोजन होगा। नवाखाई पर्व आदिवासी समुदाय के लोग धान की नई फसल आने को लेकर त्योहार मनाते हैं और यह फसल को सबसे पहले अपने आराध्य देव बूढ़ादेव को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
नई फसल को अर्पण करने के बाद एक साथ बैठकर पूरे परिवार को इसे कोरिया के पत्ते में प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है। इसके पूर्व घर की बहू सभी का आरती उतारकर प्रसाद का वितरण करती है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह भी मान्यता है कि आदिवासी समुदाय में जो भावी बहू होती है उसे भी इस दिन अपने घर ले आकर नया खिलाने का रस्म पूरा किया जाता है। इसके लिए समुदाय के लोग अपने घर परिवार में साथ मिलकर ही यह त्योहार मनाते हैं

कोरिया पान में ईष्ट देव को अर्पित की नई फसल
दसपुर| नवाखाई पर्व पर दसपुर में सुरिया नेताम के निवास स्थल में मनाया गया। यहां समाजजनों द्वारा अपने ईष्ट देव, कुलदेवी की अर्जी विनती कर नया चावल को कोरिया पान में अर्पण किया। सभी ने सुख-समृद्धि की कामना की। इस मौके पर सुरिया नेताम, रिया नेताम, अमीत नेताम, पुनीता नेताम, महेंद्र सलाम, आयुष नेताम, घुरवा उसेंडी, जयसिंग मरकाम, किरन कुंजाम आदि उपस्थित थे।



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Tribal society celebrated the festival by offering a new crop to old god


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