गांव के साथ शहरों में भी रोका छेका अभियान शुरू जरूर किया गया है लेकिन यह केवल खानापूर्ति ही साबित हुआ। अभियान मवेशियों को पकड़ने के साथ जोर शोर से शुरू हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद यह सिलसिला बंद कर दिया गया। शहर में तो रोका छेका अभियान का थोड़ा भी असर नहीं दिख रहा है क्योंकि सड़कों पर मवेशियों का जमावाड़ा पूरे समय बना रहता है।
पूरे प्रदेश मेें जून माह में रोका छेका अभियान शुरू किया गया। गांवों में ग्राम पंचायत को आवारा मवेशियों को पकड़ गोठानों में रखना था। शहर में नगर पालिका को इस अभियान के तहत आवारा मवेशियों को पकड़ कांजी हाउस में रखना था। अभियान शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं लेकिन शहर में तो इसका कोई असर देखने का नहीं मिल रहा है। शहर के बीच से गुजरने वाली नेशनल हाईवे पर ज्ञानी चौक, लट्टीपारा कन्या शाला, दुधनदी पुल, संतोषी मंदिर के पास, नया बस स्टैंड के सामने, पुत्री शाला के सामने मवेशियों का जमावाड़ा पूरे समय बना रहता है। शहर के अन्य हिस्सों सेन चौक, बरदेभाठा चौक, शिवनगर, अन्नपूर्णापारा, सिविल लाईन, संजय नगर, जवाहर वार्ड में भी सड़कों पर आवारा मवेशियों का झुंड लगा रहता है। चौबीसों घंटे सड़कों पर मवेशियों का जमावाड़ा बने रहने से आए दिन मवेशी वाहनों की ठोकर से घायल हो जाते हैं। कई बार तो इससे उनकी मौत हो चुकी है।
बाजार में उत्पात मचाते हैं मवेशी, लोग परेशान
मवेशियों को लेकर सबसे ज्यादा परेशान शहर के नया बाजार के सब्जी व्यापारी रहते हैं। सब्जी बाजार में बड़ी संख्या में मवेशी घूमते रहते हैं। सब्जी व्यापारियों या बाजार पहुंचने वालों की थोड़ी भी नजर चुकते ही मवेशी सब्जी चट कर जाते हैं।
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