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बारिश से फसल हुई खराब इसलिए लोकल आवक कमजोर, अब सब्जियों के दाम बढ़े

जिले में तीन दिन तक लगातार हुई बारिश से नदी, नाले उफान पर हैं। जलाशय लबालब हो गए हैं तो वहीं खेतों और बाड़ियों में भी पानी भर गया। इस बारिश से सूख रही धान की फसल के लिए अमृत का काम किया है तो वहीं उद्यानिकी फसल लगाने वाले किसानों की कमर तोड़ दी है। बाड़ियों में लगाई गई फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। सब्जियों के खराब होने की वजह से इसका सीधा असर मंडी में दिखाई देने लगा है। लोकल आवक कमजोर होते ही सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। 40 रुपए कम कीमत में कोई भी सब्जी नहीं बिक रही है। रविवार को ही बसंतपुर स्थित मंडी में टमाटर प्रति कैरेट 700 से 800 रुपए में बिका।

सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि बारिश के बाद से शहर से 8 से 10 किमी के दायरे से जिन बाड़ियों से सब्जी आ रही थी, वहां से आवक ही नहीं हो रही है। नदी किनारे बसे मोहड़, जंगलेसर, सिंगदई गांव की बाड़ियों में शिवनाथ नदी का पानी भरने से सब्जियां खराब हो गई हैं। किसान मंडी तक सब्जी नहीं ला रहे हैं। सब्जी विक्रेता संघ के अजय जायसवाल ने बताया कि मंडी में अभी केवल बाहरी आवक हो रही है। बाहर से सब्जी मंगाने में भी भारी नुकसान हो रहा है।

बाहर से आ रही सब्जियां

बताया कि ओडिशा से मुनगा आ रहा है। बेंगलुरू से टमाटर की खेप पहुंच रही है। दिल्ली की ओर से कुम्हड़ा मंगा रहे हैं। इसी तरह ओडिशा से परवल और खेखसी की आवक हो रही है। बाहर से ज्यादा सब्जियां आने की वजह से दाम बढ़े हैं। जब तक लोकल बाड़ियों की आवक नहीं बढ़ेगी, दाम ऐसे ही रहेंगे। बाहर से सब्जी मंगाने पर परिवहन के दौरान ही कई किलो सब्जी खराब हो जा रही है।

इन फसलों को नुकसान

इधर उद्यानिकी फसल लेने वाले किसान मनोहर दुबे और राकेश साहू ने बताया कि बारिश लगातार होने की वजह से बाड़ी में लगाए गए फसल को बचा नहीं पाए। बैगन, गोभी, पत्ता गोभी, सेमी सहित अन्य सब्जी लगाई गई थी पर बारिश की भेंट चढ़ गए हैं। जिला किसान संघ के प्रमुख सुदेश टीकम ने बताया कि इस बारिश से धान की खराब होती फसल को फायदा हुआ है।

गंभीरता से किया जाए सर्वे

क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उद्यानिकी फसलों का बीमा भी कराया गया है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि गंभीरता के साथ नुकसान का आंकलन करें ताकि किसानों को राहत मिल सके। किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उद्यानिकी में फसल बीमा योजना को हर उन किसानों तक पहुंचाना चाहिए जो कि छोटे से रकबे में भी उद्यानिकी की फसल लगाता है।

कृषि उपसंचालक ने कहा- खरपतवार नाशी का उपयोग सावधान से करें

कोरोनाकाल में किसानों को दाेहरी मार झेलनी पड़ रही है। इधर उपसंचालक कृषि जीएस धुर्वे ने बताया कि खरपतवार नाशी छिड़काव के लिए नैकशैक स्प्रेयर के साथ फ्लैटफेन नोजल का प्रयोग करें, किसी भी फसल में खरपतवार नाशी प्रयोग करते समय खेत में नमी होना चाहिए।

खरपतवारनाशियों का छिड़काव शाम के समय या हवा अधिक तेज न होने की स्थिति में ही करें। उप संचालक द्वारा समस्त अमलों को निर्देशित किया गया है कि जिले में फसल स्थिति का निरंतर निरीक्षण करते रहे एवं किसानों को खरपतवार प्रबंधन संबंधी जानकारी किसानों को देते रहे, अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारियों से सम्पर्क करें।



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