बारिश के मौसम में संक्रमण का ज्यादा खतरा रहता है लेकिन शहर के प्राय: वार्डों में गंदगी पसरी हुई है। पिछले दस सालों में जिस गांव में कचरा फेंकने जगह चिह्नांकित की गई हर बार विरोध के चलते कचरा फेंकना बंद करना पड़ा।
खुले में फेंके जाने वाले कचरा का उठाव नहीं हो पा रहा है। नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पालिका को शहर की नालियों तथा खुले में फेंके जाने वाले कचरे को डंप करने जगह नहीं मिलना है। सबसे ज्यादा समस्या शहर के मांझापारा व सुभाष वार्ड में है जहां नालियो में गंदगी पसरी है। सिंधी धर्मशाला के पास नाली में कचरा पड़ा है। तहसील कार्यालय के सामने कंटेनर से कचरा गिर रहा है। डेली मार्केट में गंदगी पसरी है। पुराना बसस्टैंड नदी तट के सामने कचरा की सफाई नहीं हो पा रही है। शीतला तालाब तट में कूड़ादान भर गया है। आमापारा में दीवान तालाब के सामने गंदगी का ढ़ेर पड़ा है। बरदेभाठा में खुले में ही कचरा माह भर से पड़ा है। कंकालिन पारा, झुनियापारा में भी सड़क किनारे कचरा पड़ा है। साप्ताहिक बाजार व नया बस स्टैंड में भी गंदगी पसरी हुई है। इधर पालिका ने एक शर्त रख दी। जो भी पार्षद अपने वार्ड की सफाई कराते कचरा उठवाना चाहता है उसे ही कचरा फेंकने जगह तय कर देनी होगी। नगरपालिका की प्रभारी सीएमओ कल्पना ध्रुव ने कहा कचरा फेंकने जगह तलाशी जा रही है। कचरा से जैविक खाद बनाने प्लांट लगाया जाएगा।
बोर्ड लगाने से भी कोई फायदा नहीं
अघननगर में कचरा नहीं फेंकने निवेदन करते बोर्ड पार्षद जागेश्वरी साहू ने लगवाया है लेकिन इसी जगह पर कचरा फंका जा रहा है। इस वार्ड में रोजाना कचरा वाहन पहुंचता है फिर भी लोग खुले में ही कचरा फंक रहे है।
जहां फेंकते हैं कचरा वहां हो जाता है विरोध
ग्राम माकड़ी- दस साल पहले शहर में सबसे पहले ग्राम माकड़ी में खाली जगह का चयन शहर का कचरा डंप करने किया गया। कुछ ही दिनों में ग्रामीणों ने इसका विरोध किया जिसके बाद यहां कचरा फेंकना बंद किया गया।
ग्राम कुलगांव- सात साल पहले कुलगांव में कचरा फेंकने स्थल चयन किया गया। ग्रामीणों ने पालिका के कचरा वाहन को ड्रायवर सहित बंधक बना लिया। इसके बाद कचरा फेंकना बंद किया।
ग्राम बेवरती - पांच साल पहले बेवरती में शहर का कचरा फेंकने स्थल चयन किया गया। कुछ ही दिनों में विरोध के चलते कचरा फेंकना बंद करना पड़ा।
ग्राम ठेल्काबोड़ - दो साल पहले ठेल्काबोड़ में खाली जमीन पर कचरा फेंकना शुरू किया। ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते बंद करना पड़ा।
ग्राम कोड़ेजुंगा - साल भर पहले कोड़ेजुंगा में एक निजि जमीन पर जमीन मालिक की सहमति से कचरा फेंकना शुरू किया गया। ग्रामीणों ने हंगामा किया जिसके बाद कचरा फेंकना बंद करना पड़ा।
दूधनदी तथा मंगल भवन निर्माण स्थल - शहर के दूधनदी तट के अलावा सुभाष वार्ड में प्रस्तावित मंगल भवन निर्माण स्थल पर कचरा फेंकना शुरू किया गया। कचरा से उठने वाली बदबू से परेशान होकर वार्ड के लोगों ने विरोध किया तो कचरा फेेंकना बंद करना पड़ा।
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