मनोज व्यास | छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पुलिस की वीरता और साहस के सम्मान के लिए शौर्य सम्मान का ऐलान किया गया है। जांबाज पुलिस जवानों और अफसरों को यह सम्मान दिया जाएगा। आरक्षक से लेकर आईपीएस अफसर तक बिना किसी की अनुशंसा के सीधे आवेदन भेज सकेंगे। शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत दिवस पर दस दिसंबर को पहला पुरस्कार दिया जाएगा। शौर्य सम्मान देने वाला छत्तीसगढ़ संभवत: पहला राज्य होगा। जांबाज पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए डीजीपी डीएम अवस्थी ने यह सम्मान देने का फैसला किया है। राज्य गठन के बाद अब तक छत्तीसगढ़ स्तर पर पुलिसकर्मियों के लिए कोई भी सम्मान नहीं की योजना नहीं थी।
राष्ट्रपति पदक के लिए नामांकन भेजा जाता था। इसमें भी जो प्रक्रिया थी, उसके अंतर्गत एसपी की अनुशंसा से ही पुलिस मुख्यालय को नामांकन भेजा जाता था, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा जाता था। डीजीपी डीएम अवस्थी ने इस प्रक्रिया के बजाय सीधे आवेदन मंगाए हैं। खास बात यह है कि राज्य बनने के बाद से अब तक सभी पुलिसकर्मी और अधिकारी अपने नामांकन भेज सकेंगे। इसमें रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस की ओर से डिस्क और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। बता दें कि राज्य बनने के बाद अब तक पुलिस टीम में काफी बड़ा बदलाव आया है। राज्य गठन के समय करीब 22 हजार पुलिसबल था। अब पुलिसबल की संख्या 75 हजार से ज्यादा हो गई है। 293 थाने थे, जो अब 467 हो चुके हैं। सशस्त्र बल की 22 बटालियन है।
नक्सल मोर्चे पर जांबाजी से लड़ रहे जवान
राज्य में 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं, जिनमें 8 में यह समस्या काफी गंभीर है। इन जिलों में पुलिसकर्मी जांबाजी से लड़ रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई में जान जोखिम में डालकर जवान ऑपरेशन चला रहे हैं। ऐसे सभी साहसी जवानों को शौर्य सम्मान से नवाजा जाएगा। मैदानी क्षेत्रों में भी साहस से लॉ एंड ऑर्डर कायम करने व अपराध पर अंकुश लगाने वाले जवानों का सम्मान होगा। इसके अंतर्गत कोई भी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी एआईजी इंटेलीजेंस को 30 सितंबर तक अपना नामांकन भेज सकते हैं।
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