राजधानी के प्राइवेट अस्पतालों में अब सर्जरी के पहले कोरोना की जांच अनिवार्य कर दी गयी है। बेहद इमजरेंसी को छोड़कर बाकी सारे ऑपरेशन कोरोना जांच की रिपोर्ट के आने के बाद ही किए जाएंगे। शहर में जिस तेजी से कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, उसी को देखते हुए डाक्टरों ने ये फैसला लिया है। कोरोना जांच हो जाने से डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका कम हो जाएगी। डाक्टरों के इस फैसले के बाद निजी अस्पतालों से रोजाना 90 से 100 सैंपल सरकारी और निजी लैब भेजे जाने शुरू भी हो गए हैं।
राजधानी में मार्च से अब तक पांच हजार 800 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। 2 हजार चार सौ अभी एक्टिव केस हैं। अलग-अलग अस्पतालों और कोविड सेंटरों में उनका इलाज चल रहा है। इस बीच सरकारी के साथ कई प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीज, डॉक्टर और वहां का मेडिकल स्टाफ पॉजिटिव हो चुका है। माना जा रहा है कि संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने के कारण ही डाक्टर और मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। इसी वजह से अब निजी अस्पताल के प्रबंधन ने जरूरी एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। डाक्टरों का कहना है के बेहद इमरजेंसी वाले केस को छोड़कर बाकी सारे ऑपरेशन कोरोना के जांच के बाद ही किए जा रहे हैं। निजी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. युसूफ मेमन, डॉ. देवेंद्र नायक, डॉ. कमलेश अग्रवाल के अनुसार राजधानी में कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में ओपीडी व सर्जरी के लिए जरूरी प्रोटोकाल का पालन करना अनिवार्य हो गया है। डॉक्टरों ने बताया कि रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग रहा है। इस कारण कई बार मरीज भी परेशान होने लगते हैं, लेकिन सर्जरी के लिए वे इतना सहन भी कर रहे हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक मरीजों को आइसोलेटेड वार्ड में रखा जा रहा है ताकि भर्ती मरीजों में संक्रमण की आशंका बिल्कुल न रहे। मरीज को पहले ही बता दिया जाता है कि जांच जरूरी है। कुछ मरीज इसका विरोध करते हैं, लेकिन बाद में समझाईश के बाद सैंपल देने के लिए राजी हो जाते हैं।
नेगेटिव रिपोर्ट आने पर जांच शुल्क में छूट भी
निजी अस्पताल वाले प्रदेश के तीन निजी लैब में स्वाब का सैंपल भेज रहे हैं। इसकी जांच दिल्ली व मुंबई स्थित लैब में हो रही है। कुछ लैब रिपोर्ट नेगेटिव आने पर 2000 रुपए तक की छूट दे रही है। उदाहरण के लिए जांच के लिए 4500 रुपए शुल्क तय है। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर उनसे 2500 रुपए लिया जा रहा है। इससे मरीजों को संतुष्टि भी हो रही है।
हर मरीज के बाद चेयर को किया जा रहा सैनिटाइज
डेंटल और नेत्र अस्पताल के डाक्टरों को खास सावधानी बरतनी पड़ रही है। डेंटल विशेषज्ञ डा. अरविंद जैन और नेत्र चिकित्सक डा. अनिल गुप्ता के अनुसार दांत और नेत्र के मरीजों की बारीकी से जांच करनी पड़ती है। इसके लिए मरीज के करीब जाना पड़ता है। ऐसे डाक्टर सीधे खतरे में रहते हैं। बिना डेंटल और नेत्र चेयर का उपयोग किए मरीजों की जांच भी संभव नहीं है। ऐसी दशा में हर मरीज की जांच के बाद चेयर को सैनिटाइज करना पड़ रहा है।
अस्पताल में एंट्री पर भी सावधानी
सभी प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की एंट्री पर भी बेहद सावधानी बरती जा रही है। थर्मल स्क्रीनिंग के साथ-साथ उन्हें सेनिटाइज किया जा रहा है। उसके बाद ही मरीजों को प्रवेश दिया जा रहा है। डाक्टरों के चेंबर में भी केवल मरीज को भी प्रवेश दिया जा रहा है। ज्यादा जरूरी होने पर ही एक अटेंडर को एंट्री दी जा रही है।
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