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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने शुरू किया मॉम्स फूड

सिविल इंजीनियर की पढ़ाई करने के बाद छात्रों का सपना होता है वे लाखों रूपए की नौकरी करें । इसके लिए वे हर संभव कोशिश करते हैं । लेकिन बस्तर जिले के इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र लाखों रूपए की नौकरी छोड़कर इस समय जामेटो और स्वीगी की तर्ज पर काम करते हुए जहां खुद रोजगार से जुड़े हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर अपने इस मिशन में 170 घरेलू महिलाओं को जोड़कर वे उन्हें रोजगार देेने के साथ ही आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
कोरोना के संक्रमणकाल के शुरू होने से लेकर अब तक इन छात्रों ने इस योजना से 70 महिलाओं को जोड़ चुके हैं। केटरिंग सर्विस से जुड़ने के बाद महिलाओं को जहां अतिरिक्त आमदनी हो रही है तो वहीं उनके इस काम में उनके परिवार के लोग भी सहयोग कर रहे हैं। गौरतलब है कि महिलाओं के इस काम में बड़ी संख्या में जुड़ने से छात्रों ने इस केटरिंग सर्विस का नाम माम्स फूड रखा है। महिलाएं घर बैठे ही अतिरिक्त आमदनी के रूप में 5 से 7 हजार रुपए हर महीने कमा रही हैं।
अब स्टाल लगाकर दे रहे सेवा: माम्स फूड की सुविधा हर किसी को मिले इसके लिए छात्रों ने पहले इस काम को केवल ऑनलाइन शुरू किया था । लेकिन कोरोना संक्रमण के बीच लोगों तक घर का खाना पहुंचाने के लिए ये छात्र इन दिनों में कृषि उपज मंडी के साथ ही शहीद पार्क में स्टाल लगा रहे हैं । जहां पर हर किसी को 20 रूपए से लेकर 70 रूपए में नाश्ता व खाना दे रहे है । शहीद पार्क के पास नाश्ता कर रहे लोगों ने बताया कि छात्र जो खाना स्टाल लगाकर बेच रहे हैं वह काफी स्वादिष्ट है और कम दाम पर मिल रहा है । जिसके चलते लोग अन्य जगहों से इसे खाने के लिए आ रहे हैं । छात्र मनोज कुमार साहू ने बताया कि ऑनलाइन सुविधा देने के साथ ही आने वाले दिनों में शहर के कोतवाली, दंतेश्वरी मंदिर, कुम्हारपारा, धरमपुरा में स्टाल लगाया जाएगा और लोगों को घर का बना नाश्ता व खाना खिलाया जाएगा।

किफायती दर पर ही मां के हाथ का खाना लोगों तक पहुंचाना था चुनौती, कोशिश का असर बिलासपुर में भी
इंजीनियरिंग छात्र मनोज कुमार साहू, मनीष कुमार साहू, फूलधर सेठिया, आदित्य देवांगन, नरेश, सत्यम, हिमांशु, गौरव और देवेश ने मिलकर शुरू की इस सर्विस का नाम मॉम्स फूड रखा है, जिसे मैस आफ मदर्स कहा जा रहा है। मनोज ने बताया कि किफायती दर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मां के हाथ का खाना पहुंचाना उनके लिए चुनौती थी, लेकिन इसके लिए उन्होंने लोगों से डोर टू डोर जाकर सर्वे किया और इस बात का पता लगाया कि कितनी महिलाएं दोपहर या शाम के समय पर घरों में खाली रहती हैं। अब तक ऐसी 175 महिलाओं को है।

डेढ़ साल में 16 हजार से अधिक आर्डर मिल चुके है
छात्रों ने बताया कि मॉम्स फूड कैटेरिंग की शुरूआत 19 महीने पहले की थी। अब तक उन्हें 16 हजार आर्डर मिल चुका है। मनोज ने बताया कि इस कैटरिंग ग्रुप से जुड़े सदस्यों को भिलाई की दिव्यांशी इंजीनियरिंग कंसलटेंसी और यहीं की टेकमेंट टेक्नोलाजी कंपनी शामिल हैं।



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