क्षेत्र के पैलीमेटा-सुरही जलाशय में पिछले 30 वर्षों से जो मछुआरा समिति पैलीमेटा बांध में मछली पालन करते आ रहे थे उसे अधिकारियों से मिलीभगत करके हटा दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार मछुआ समिति को मध्यप्रदेश शासन द्वारा 30 वर्ष पूर्व पट्टा दिया गया था। यह पट्टा निषाद आदिवासी समिति को मछली पकड़ने अधिकार दिया था। तब से ये लोग जलाशय में मछली पालन करते आ रहे थे। अचानक ही मछली पालन विभाग के अधिकारियों ने दबाव में आकर समिति को ही अमान्य करते हुए एक पुरानी समिति को फिर से जीवित किया और उसे ही पट्टे पर दे दिया गया।
दुर्ग-भिलाई के ठेकेदार और व्यक्ति विशेष की पसंद के आधार पर पट्टा दिया। इस में अधिकारियों ने अपने पसंद के नियमों को लागू किया। विधायक देवव्रत सिंह का कहना है कि जिले के अधिकारियों ने नियमों का पालन नहीं किया। उन्हीं बिंदुओं को पालन कराया गया जो उन्हें अंदर खाने से लाभ दे सकते थे। विधायक ने उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
विधायक ने बताया है कि जो समिति आठ किलोमीटर के बाहर से है उसको किसके दबाव में आकर मछली पकड़ने का पट्टा दिया गया और पुरानी समिति को क्यों हटा गया यह जांच का विषय है। निष्पक्ष जांच के बाद बहुत सारे तथ्य सामने आएंगे। विधायक सिंह के विषय का समर्थन करते हुए खुज्जी विधानसभा से कांग्रेसी विधायक छन्नी साहू ने भी कहा कि अधिकारी के कार्यप्रणाली की पूरी जांच कराई जाए।
विधायक को दिया भरोसा
कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि विधायक देवव्रत सिंह काफी वरिष्ठ हैं और उनको इस मामले पर शंका है तो इसकी हम जांच कराएंगे और हम खुद चाहते हैं कि गरीब मछुआरों के लिए जो हमारी नीति है उसके तहत उन लोगों को ही मछली पालन का अधिकार मिले।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/32y4PXu
via
Comments
Post a Comment