शनिवार को शहर के तीनों मस्जिदों में ईदुल अजहा की विशेष नमाज अदा की गई। अबतक के इतिहास में यह पहला मौका था जब कोरोना संक्रमण के चलते ईद के दिन रस्मों के अनुसार मुबारकबाद देने मुस्लिम समाज के लोग एक दूसरे से गले नहीं मिल सके। ईदुल अजहा की नमाज के साथ ही अन्य सभी रस्में अदा की गई। लोगों ने परंपरा के अनुसार कुर्बानियां दी। सोशल मीडिया के जरिए ईद की मुबारक बाद देते रहे। नमाज के बाद शहर व देश को कोरोना के संक्रमण से बचाने दुआ मांगी गई।
कोरोना के संक्रमण व ईदगाह में नमाज पर प्रतिबंध को देखते पहले ही अंजुमन इस्लामिया कमेटी कांकेर ने शहर की मस्जिदों में ईद की नमाज अदा करने एलान कर दिया था। ईद के दो दिन पहले प्रशासन के साथ अंजुमन इस्लामियां की बैठक भी हुई थी जिसमें शर्तों के साथ शहर की मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। इसका पालन करते शहर के तीनों मस्जिदों में 1 अगस्त को ईद की विशेष नमाज अदा की गई।
नमाजियों की भीड़ को बांटने तीनों मस्जिदों में नमाज का समय अलग अलग तय कर दिया गया था। हनफिया जामा मस्जिद कांकेर में शहर काजी हाजी शाकिर अली, सिब्तैन रजा मस्जिद संजय नगर में मौलाना शहनवाज आलम तथा अमीने शरीयत मस्जिद रजा नगर में हाफिज बशारत अली की ईमामत में ईद की नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद में तकरीर करते हाजी शाकिर अली ने पहले ही एलान कर दिया था कि कोरोना संक्रमण को देखते व सरकार के नियमों के अनुसार गले मिलकर कोई भी मुबारक बाद पेश नहीं करेगा।
कोरोना ने हज यात्रा पर भी लगाया ब्रेक
इस साल कोरोना सभी त्योहारों पर अपना प्रभाव दिखा रहा है। ईदुल अजहा के दौरान कांकेर से बड़ी संया में हाजी हज यात्रा करते हैं। इसके लिए पिछले साल बड़ी संंख्या में लोगों ने आवेदन किया था। छग हज कमेटी के माध्यम से जिले के 6 लोगों का चयन किया गया था। इनके द्वारा हज की रकम भी अदा कर दी गई थी लेकिन कोरोना के चलते हज यात्रा पर लगी रोक से हाज यात्रा नहीं हो पाई। विदित हो इस साल पहली बार कोरोना के कारण ही रमजान के बाद ईद की भी नमाज नहीं हो पाई थी।
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