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दूसरे दिन आटा से बने नाग-नागिन का विसर्जन

ऋषि पंचमी पर्व के दूसरे दिन आटा से बने नाग-नागिन के प्रतीक तथा पूजन सामग्री का विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा पारंपरिक ढंग से पंचमी गीत गाते निकाली गई। जिस मार्ग से विसर्जन यात्रा निकली रास्ते में श्रद्धालुओं ने यात्रा को रोककर पूजन किया।
शहर के भंडारीपारा तथा राजापार्रा में 23 अगस्त को ऋषि पंचमी पर्व पर पंचमी सदस्यों ने दिन भर उपवास रख पैदल जंगल, पहाड़ पहुंचे और जड़ी बूटी तलाश की लाई। जड़ी बूटी लेकर मंदिर पहुंचे और रात में नाग नागिन के अलावा गुरुओं की पूजा की। अगले दिन 24 अगस्त को पंचमी से जुड़े सदस्यों ने विसर्जन यात्रा निकाली। भंडारीपारा में दो अलग-अलग जगह से विसर्जन निकाली गई। एक टोली गुरू ननकुराम साहू के घर से निकली। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने नारियल, फल, फूल चढ़ाकर पूजन किया। दूसरी टोली गुरू कैलाश यादव के घर से निकली। रास्तेभर पंचमी गीत वाद्ययंत्र के धुन पर गाते चले। रास्ते भर नाग-नागिन की पूजा की गई। दूधनदी में आटा से बने नाग नागिन, नाव के साथ अन्य पूजन सामग्री का विसर्जन किया गया। विसर्जन यात्रा में शामिल सोनू यादव, बिल्लु धनकर, गोकुल यादव, जोहन यादव, ईश्वर पटेल, मनीष धनकर, छोटू यादव, गोलू यादव, महेंद्र यादव ने कहा ऋषि पंचमी पर उनकी काफी आस्था है।



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Immersion of serpent-made serpent on the second day


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