शासन की अनदेखी के चलते अंदरुनी क्षेत्र के ग्रामीण मुख्यधारा से नहीं जुड़ पा रहे हैं। ऐसा ही गांव पोरियाहुर है। इस गांव में ग्यारह परिवार है। यहां सभी घरों में सोलर प्लेट लगाई गई थी लेकिन अब सभी प्लेट खराब पड़ी है। विभाग को जानकारी होने के बाद भी प्लेट सुधारने नहीं को नहीं आया। इससे अब बारिश के दिनों में भी लालटेन के सहारे ही रात गुजरनी पड़ रही है।
कोयलीबेडा ब्लॉक के ग्राम पंचायत स्वरूप नगर के आश्रित ग्राम पोरियाहुर हमेशा ही मूलभूत सुविधा से वंचित रहा है। लगभग सौ लोगों की आबादी वाला छोटा सा आदिवासी गांव होने के कारण कोई भी अधिकारी व नेता इस ओर ध्यान नहीं देता। मोडा राम, कांडे, सुखराम ने बताया कि गांव में सभी लोग अनपढ़ हैं। अनपढ़ और अंदरुनी क्षेत्र होने के चलते हमें समझ में नहीं आता कि हम जाए कहां। चार माह पहले क्रीडा विभाग के कर्मचारी एक बार गांव आए और देखकर फिर से आने की बात कहकर चले गए। इसके बाद से अब तक दोबारा गांव नहीं पहुंचे हैं। अब सोलर प्लेट पड़े-पड़े जंग खा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि महीने में एक लीटर केरोसिन मिलता है, जो मुश्किल से एक सप्ताह चलता है। इसके बाद महीने के बचे दिनों में लकड़ी जला कर सोना पड़ता हैं। अंधेरे में सांप, बिच्छू सहित अन्य जीव-जंतु का डर बना रहता है।
सामान उपलब्ध नहीं है, आते ही बनाया जाएगा : क्रीडा अधिकारी कांकेर मनोज शोरी ने कहा कि मुझे पोरियाहुर में सोलर प्लेट खराब होने की जानकारी मिली है। अंतागढ़ से कर्मचारी भेजा गया था। हमारे पास सामान उपलब्ध नहीं थे, जिससे बना नहीं पाए। सामान आते ही मरम्मत की जाएगी।
गांव में अब तक नहीं पहुंची ये योजनाएं
शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन अब तक कई योजना यहां पहुंच नहीं पाई है। इसमें उज्जवल गैस योजना, किसान क्रेडिट, दीनदयाल उपाध्यय ग्राम ज्योति योजना के तहत हर गांव के मंजराटोला तक बिजली, विधवा पेंशन जैसे तमाम योजनाएं नहीं पहुंच रही है। परियाहुर के ग्रामीणों ने कहा गांव में कई समस्याएं हैं। यहां आंगनबाड़ी तो हैं, लेकिन तीन साल से कार्यकर्ता नहीं पहुंच रही हैं। सहायिका के सहारे आंगनबाड़ी चल रहा है।
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