मोहम्मद इमरान नेवी | जगदलपुर मेडिकल काॅलेज में जल्द सीटी स्कैन से भी काेराेना का टेस्ट हाेगा। अभी आरटी-पीसीआर, एंटीजेन और रैपिड किट से ही कोविड की जांच हो रही है। छत्तीसगढ़ में अब पहली बार सीटी स्कैन का उपयोग यह जांचने के लिए हाेगा कि व्यक्ति काेराेना निगेटिव है या पाॅजिटिव। यह जांच स्वाब सैंपल लेने से आसान रहेगी, इसकी रिपोर्ट जल्दी आएगी साथ ही खर्च भी कम होगा।
चीन, अमेरिका समेत कई देशों में होने वाली जांच में यह निष्कर्ष निकला कि आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) की तुलना में सीटी स्कैन ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है। अभी आंध्रप्रदेश में सीटी स्कैन से कोविड टेस्ट बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। मेकाॅज में प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही है। माना जा रहा कि अगले हफ्ते तक जांच शुरू हो जाएगी।
बूढ़ों-बच्चों का सैंपल लेना है आसान: गंभीर मरीजों के अलावा बच्चों और बूढ़ों का स्वाब सैंपल लेने में दिक्कतें आती हैं। ऐसे में सीटी स्कैन बेहतर विकल्प है। लगभग सभी संभाग और कुछ जिला मुख्यालयों में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च की जरूरत भी नहीं है।
सीटी स्कैन से ऐसे होती है संक्रमण की पहचान
कोरोना टेस्ट के लिए सीने का स्कैन कर कोरेड काउंट देखा जाता है। सामान्यत: 4 से ज्यादा कोरेड मिलने पर व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव माना जाता है। 4 तक का आंकड़ा भी संक्रमण के खतरे की आशंका दिखाता है। कोरेड की गिनती का क्रम 1 से लेकर 25 तक होता है। आंध्र में यदि आरटी-पीसीआर से किसी की रिपोर्ट निगेटिव आती है, मगर उसमें कोरोना के लक्षण दिख रहे तो सीटी स्कैन से जांच जरूर करवाई जा रही है। ऐसे ढेरों केस आ रहे जिनमें कोरेड चार से ज्यादा मिले, जबकि स्वाब सैंपल निगेटिव था।
अच्छी खबर : अब रेमडेसिवीर की डोज भी दे रहे
इधर मेकाॅज में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को अब रेमडेसिवीर इंजेक्शन भी दिया जा रहा है। अब तक इसका इस्तेमाल सिर्फ रायपुर एम्स में हो रहा था। रविवार को मेकाॅज में भर्ती दो पॉजिटिव मरीजों को रेमडेसिवीर की डोज दी गई है। यह इंजेक्शन गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को ही दिया जा रहा है। अलग-अलग कंपनियों का यह इंजेक्शन डोज के मुताबिक भारत में 3 से 50 हजार तक में उपलब्ध है। अभी यह सरकारी सप्लाई में उपलब्ध नहीं है। जल्द ही इसे उपलब्ध करवाया जायेगा। यह इंजेक्शन छत्तीसगढ़ के खुले दवा बाजार में भी उपलब्ध नहीं है। अभी सरकारी हॉस्पिटल में भी इसे दीगर राज्यों से मंगवाया जा रहा है।
मेकाॅज की मशीन से कोरोना जांच की जाएगी
बताया जा रहा कि कोरोना टेस्ट के लिए जगदलपुर मेडिकल कॉलेज की सीटी स्कैन मशीन को अधिकृत कर लिया जाएगा। जबकि महारानी हॉस्पिटल की मशीन को दूसरी जांचों के लिए रखा जाएगा। हालांकि इसकी अधिकृत घोषणा अभी नहीं हुई है।
जानिए... कोरेड की पहचान ऐसे होती है
सीटी स्कैन से कोरोना जांच के लिए हाईरेजोल्यूशन स्कैनर का उपयोग होता है। फेफड़ों की स्कैनिंग के बाद इसके पैचेस देखे जाते हैं। यह निशान निमोनिया में भी पड़ते हैं पर कोरोना में अलग दिखते हैं। इन्हें ही कोरेड कहते हैं। तस्वीर ज्यादा साफ आए इसलिए 1 एमएम फ्रिक्वेंसी में रिपोर्ट निकाली जाती है, जबकि सामान्य स्कैन में 5 एमएम होता है।
10-15 मिनट में मिलेगी रिपोर्ट, खर्च भी कम
सीटी स्कैन से कोरोना जांच में 10 से 15 मिनट में रिपोर्टिंग का काम पूरा हो जाता है। आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट में कम से कम 4 घंटे का समय लगता है। सरकार को होने वाला खर्च देखें तो सीटी स्कैन में करीब 200 सौ रुपये का खर्च आएगा, जबकि आरटी-पीसीआर जांच में कम से कम 1 हजार रुपये हर सैंपल की जांच में खर्च होते हैं।
"सीटी स्कैन से जांच की तैयारी अभी प्रक्रिया में है। शासन से हरी झंडी मिलते ही यहां भी सीटी स्कैन से कोरोना टेस्ट की शुरुआत करवा दी जाएगी। इस पर कोविड हॉस्पिटल में तैनात विशेषज्ञों से चर्चा चल रही है।"
- रजत बंसल, कलेक्टर, बस्तर
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