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भाई के लिए बहन ने रखा व्रत, बहन को भाई ने फोन पर सुनाई मोटिवेशनल स्टोरी

ड्यूटी के दौरान भाई हुआ कोरोना संक्रमित वीडियो काॅल से जाना हालचाल, रोज की प्रार्थना

25 साल के डोमनलाल साहू ट्रैफिक पुलिस में पदस्थ हैं। हल्के लक्षण महसूस होने पर उन्होंने कोरोना की जांच कराई। 1 जुलाई को उन्हें पता चला कि वे कोरोना संक्रमित हैं। परिवार वालों को भी ये पता चल गया। सब घबरा गए, लेकिन छोटी बहन भारती साहू ने हिम्मत बढ़ाई। 23 साल की भारती नर्स हैं। इलाज के दौरान बहन वीडियो कॉल के जरिए भाई से हालचाल पूछती थी। भारती ने बताया, पैरेंट्स को भाई की तबियत के बारे में मैं ही बताती थी। भैया की सलामती के लिए सोमवार को व्रत रखा और रोज भगवान से उनके ठीक होने के लिए प्रार्थना की। लेकिन कोरोना संक्रमित होने के बाद गांव वालों का परिवार के लिए व्यवहार बदल गया। गांव वाले कहने लगे- तुम्हारे भाई के कारण गांव में काेरोना आया है। तब उन्हें समझाती थी कि भैया की लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था में ड्यूटी थी। उन्होंने एक योद्धा के रूप में लोगों की सेवा की है। ड्यूटी के दौरान किसी संक्रमित के संपर्क में आने से वो भी कोरोना के चपेट में आ गए हैं, लेकिन वे अब स्वस्थ हैं। लेकिन गांव वालों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। वो आज भी हमसे मिलना नहीं चाहते।

ठीक होकर घर पहुंची तो छोटे भाई को देख दूर हो गई सारी टेंशन
बी ए फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट तनूजा निर्मलकर अनलॉक-2 में गुजरात से रायपुर पहुंचीं। एहतियातन उन्हें एक स्कूल में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। तब फैमिली के अलावा छोटे भाई सागर ने बहन की हर जरूरत का ख्याल रखा। 20 साल की तनुजा ने बताया, हम तीन भाई-बहन हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। सागर मुझसे दो साल छोटा है, लेकिन हम दोनों दोस्त की तरह रहते हैं। हर बात एक-दूसरे से शेयर करते हैं। क्वारंटीन सेंटर में रहने के दौरान मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। ये जानकर मैं पहले तो डर गई लेकिन दोस्त की तरह ख्याल रखने वाले भाई ने हर कदम पर मनोबल बढ़ाया। 17 जुलाई को हॉस्पिटल में एडमिट हुई तब सागर बार-बार कॉल करके हालचाल पूछता था और कहता था- टेंशन नहीं लेना दीदी, कुछ चाहिए तो कॉल कर देना। 9 दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद 26 जुलाई को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई। घर पहुंची तो दरवाजे पर मुस्कुराते हुए भाई को देख सारी टेंशन दूर हो गई। अभी फिलहाल होम क्वारंटीन हूं। अलग कमरे में रह रही हूं। इसलिए इस बार रक्षाबंधन पर भाई को राखी नहीं बांध पाऊंगी।

हर हालात में भाई ने बढ़ाई हिम्मत, बोले- डरकर नहीं डटकर जीतनी है लड़ाई...
ये कहानी है रोहिणी तांडी और उनके बड़े भाई प्रेम तांडी की। भाटागांव में रहने वालीं 23 साल की रोहिणी ने सर्दी-जुकाम होने के बाद कोरोना जांच कराई। 16 जुलाई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रेम भी घबरा गए, लेकिन हिम्मत जुटाकर बहन और परिवार को हौसला बढ़ाया। रोहिणी ने बताया, हॉस्पिटल में एडमिट होने से पहले भैया मार्केट से मेरी हर जरूरत का सामान ले आए और कहा- चिंता मत करो, कोरोना से जंग डरकर नहीं बल्कि डटकर जीतनी है...। जब मैं एडमिट हुई तब भैया दिनभर में 7 से 8 बार कॉल करके खैर-खबर पूछते थे। भैया की इन बातों से मुझे काफी हिम्मत मिली, लेकिन दो दिन बाद उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई। उन्हें भी उसी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, जहां मेरा इलाज चल रहा था। भैया को कोरोना होने की खबर से मैं डर गई, तब भी वो मुझे हौसला देते रहे। वह अपने रूम से कॉल करके मेरे बारे में पूछते रहते और मेरी हिम्मत बढ़ाने मोटिवेशनल कहानियां सुनाते थे। जब मैं ठीक होकर घर पहुंची तो मोहल्ले वालों ने हमारे घर के आसपास से भी गुजरना तक बंद कर दिया। बोलते थे- इस घर में दो-दो लोगों को कोरोना हुआ है, इनसे दूर रहो। हमें पीने का पानी लाने के लिए भी बाहर आने से मना कर दिया। कहते थे, हम पानी ला देंगे, लेकिन कोई नहीं लाता था। ये सब देखकर काफी दुख होता था। जिस दिन भैया डिस्चार्ज होकर घर लौटे तब हम सबने सुकून की सांस ली।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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