रक्षाबंधन के लिए सोमवार को मिठाई और राखी की दुकानें खुलीं जरूर लेकिन पूरे शहर के मिठाई कारोबारी इस बात से खिन्न थे कि राखी में सुबह 12 बजे तक दुकानें खोलनी हैं, इसका पता उन्हें देर रात चला। ऐसे में उनके पास मिठाई बनाने का वक्त नहीं बचा। ज्यादातर कारोबारियों ने रविवार को सीमित मात्रा में मिठाई बनवाई थी, क्योंकि रिस्क था कि दुकान खोलने का आदेश नहीं हुआ तो रखी रह जाएगी। इसलिए किसी दुकान में ज्यादा मिठाई भी नहीं थी। कई दुकानों में लाइन लगी थी, लेकिन लोगों को मिठाइयों में ऑप्शन नहीं मिले। जो मिठाई मिली, लोग उसी में संतुष्ट थे लेकिन सालभर के कारोबार को धक्का लगने से व्यापारी व्यथित हो गए।
कारोबारियों का कहना था कि प्रशासन ने मिठाई-राखी की दुकानें खोलने के लिए छूट देने का आदेश देर से जारी किया था। जब छूट देनी ही थी तो इस आदेश को शनिवार या जब तक किराना दुकानें खोली गई तभी जारी कर देना था। इससे लोगों को भी खरीदारी के लिए अच्छा समय मिलता। आमतौर पर लोग त्योहारों की खरीदी उसी दिन के बजाय एक या दो दिन पहले से करते हैं। इस वजह से भी लोग बाजारों में दिखाई नहीं दिए। आमतौर पर त्योहारों पर लोगों की भीड़ से आबाद रहने वाले गोलबाजार और मालवीय रोड में भी सूनापन छाया रहा। राखी के लिए आमापारा, गुढ़ियारी, टिकरापारा, समता कॉलोनी समेत कुछ जगहों पर स्टॉल वाले बाजार लगाए गए थे। इन जगहों पर भी लोगों की भीड़ कम दिखाई दी।
राखी में बहनों के पास जाने के लिए मांगा ई-पास, सभी अर्जी खारिज
प्रशासन को शनिवार-रविवार को ई-पास के लिए सैकड़ों आवेदन मिले। इसमें ज्यादातर आवेदन राखी बंधवाने के लिए थे। लोगों ने बहनों के घर जाने के लिए ई-पास मांगा। रायपुर के वार्डों और रायपुर से बाहर जाने बहनों के घर राखी बंधवाने के लिए ई-पास के आवेदन मिले। इस तरह के लगभग सभी आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। अफसरों ने बताया कि मेडिकल इमरजेंसी या निधन होने पर लोगों से ई-पास के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई थी। लोगों ने राखी बंधवाने के लिए भी आवेदन कर दिया। इस वजह से ऐसे आवेदनों को निरस्त करना पड़ा। राखी बंधवाने वाले आवेदनों के मिलने के साथ ही उन्हें रिजेक्ट किया गया है। हालांकि राखी के लिए आने-जाने वालों पर प्रशासन ने दोपहर तक बहुत सख्ती नहीं दिखाई। दोपहर 2 बजे के बाद पुलिस चौक-चौराहों पर सख्त हुई, लेकिन तब तक अधिकांश लोग धार्मिक परंपरा का निर्वहन कर चुके थे।
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