छत्तीसगढ़ में आयकर की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव हो गया है। रीजनल इलेक्ट्रानिक (असेस्मेंट) ऑडिट यूनिट के तहत अब यहां असेस्मेंट व अपील के केसों की सुनवाई अब प्रत्यक्ष रूप से न होकर ऑन लाइन होगी। इसके किए करदाता अपने दस्तावेज ऑनलाइन जमा करेंगे और करदाता अपना पक्ष रख सकेंगे। छत्तीसगढ़ में ऐसे करीब 500 केस हैं।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने यह बदलाव किया है। इसके साथ ही रायपुर व बिलासपुर समेत देश के 159 अफसरों के पद विलोपित कर उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है। वर्तमान में रायपुर में दो और बिलासपुर में एक प्रिंसिपल कमिश्नर इनकम टैक्स हैं। अब रायपुर व बिलासपुर के एक-एक पद को विलोपित कर इन अफसरों के पदों को प्रिंसिपल कमिश्नर इनकम टैक्स रीजनल इलेक्ट्रानिक (असेसमेंट) ऑडिट यूनिट में भेज दिया गया है। यानी इनका वर्क नेचर व पदनाम बदल गए हैं। पूरे प्रदेश में केवल रायपुर में एक पीसीआईटी पूर्व की तरह काम करते रहेंगे। इस सिस्टम के पूरे परिवर्तन का खाका अभी सामने आना बाकी है, लेकिन अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार फेसलेस सुनवाई में असेसी को पता ही नहीं होगा कि उसकी सुनवाई कौन करेगा। मसलन छत्तीसगढ़ के किसी भी असेसमेंट केस की सुनवाई प्रदेश का कोई अफसर न करके देश में किसी भी प्रदेश के अफसर करेंगे।
सर्वे बंद, पूरा काम इन्वेस्टिगेशन विंग के जिम्मे
राज्य में अब कमिश्नर अपील भी फेसलेस सुनवाई करेंगे। नए सिस्टम में एक और बड़ा परिवर्तन किया गया है। बताते हैं कि आयकर विभाग में दो तरह से कर चोरों पर कार्रवाई की जाती है। पहला सर्च और दूसरा सर्वे। सर्च का काम इंवेस्टिगेशन विंग डायरेक्टर जनरल के निर्देश पर करता है। सर्वे कमिश्नर व चीफ कमिश्नर के स्तर पर होते हैं। अब सर्वे भी खत्म किए जा रहे हैं। यह काम भी इन्वेस्टिगेशन को सौंप दिया गया है।
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