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चौक-चौराहे नहीं, इस बार केवल घरों में विराजेंगे गणपति

कोरोना संक्रमण के कारण इस बार बड़ी मूर्तियों के आर्डर नहीं मिले तो मूर्तिकारों ने छोटी मूर्तियां ही बनाईं। शहर के कुछ वार्ड में समितियों ने भी कड़े नियमों को देखते बड़ी मूर्तियां स्थापित नहीं करते हुए छोटी मूर्तियां ही अपने घरों में रखीं। 22 अगस्त को सुबह से लेकर शाम तक लोग अपने घरों में स्थापना करने छोटी मूर्तियां लेकर गए। छोटी मूर्तियों को कोई कार में लेकर गया तो कोई बाइक में। पहले विभिन्न समिति वाले बड़ी मूर्तियों को बाजे गाजे के साथ ट्रक-ट्रेेक्टरों में ले जाते थे उस प्रकार के नजारे इस बार नजर नहीं आए। इस बार सार्वजनिक स्थान में मूर्ति रखने कड़े नियम थे तथा इसके लिए नगर पालिका तथा स्थानीय प्रशासन से आवेदन लेना था लेकिन कांकेर शहर में एक भी समिति ने आवेदन नहीं किया।
22 अगस्त को घरों में लोगों ने भगवान गणेश प्रतिमा की स्थापना की। लोग मूर्तिकारों के पास सुबह 9 बजे से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। अपने सुविधानुसार कोई बाइक में तो कोई कार में मूर्तियों को लेकर गए। बाजार में 100 रूपए से लेकर केवल 500 रूपए तक की ही मूर्तियां बिकी।

सार्वजनिक स्थान नहीं घर में प्रतिमा स्थापना
झुनियापारा में नवयुवक गणेशोत्सव समिति से जुड़े मुकेश पटेल, जितेंद्र कुमार, हरीश देवांगन, अंकित कुमार ने कहा कि 7 वर्षो से भगवान गणेश की बड़ी मूर्ति सार्वजानिक स्थल पर रखते आ रहे थे। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण समिति सदस्य अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति रख रहे है। बागोड़ से पहुंचे हिमालय ठाकुर ने कहा कि गणेशोत्सव समिति 11 वर्षो से भगवान गणेश की मूर्ति रखती आ रही है लेकिन इस बार संक्रमण के कारण घर में ही मूर्ति रख रहे हैं।



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Not the square-intersection, this time only Ganpati will sit in the houses


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