बीजापुर जिले में दूसरे दिन भी मूसलाधार बारिश होने से पूरा जिला जलमग्न हो गया है। कई जगहों में लोगों के घर डूब गए हैं। भारी बारिश से जिले में करीब 87 मकान ढह गए हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क टूट गया है। सोमवार को 66 बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अभी रेस्क्यू जारी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी लगातार कर रहे हैं। बीजापुर के विभिन्न क्षेत्रों में 80 मवेशी के भी मारे जाने की खबर है। कोंटा में रविवार तक शबरी नदी का जलस्तर 13 मीटर के करीब स्थिर हो गया था, जो सोमवार को बढ़ता हुआ 15.140 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का पहला निशान 13 मीटर है। बाढ़ से पूरा कोंटा का संपर्क जिला मुख्यालय समेत ओडिशा और आंध्रप्रदेश-तेलंगाना कट गया है।
दोरनापाल नगर पंचायत में बारिश के कारण 3 मकान ढह गए हैं। इनमें कोई हताहत होने की जानकारी नहीं है। अचानक पानी भरता देख नगर पंचायत के कर्मचारियों ने 7 से ज्यादा मकानों को खाली करवा दिया। सोमवार को बस्तर जिले में 16.3, कोंडागांव 24.6, कांकेर 14.5, नारायणपुर 16.5, दंतेवाड़ा 40.8, सुकमा 31.5, बीजापुर 27.4 मिमी बारिश हुई।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही शबरी नदी
कोंटा से होकर बहने वाली शबरी और भद्राचलम से होकर बहने वाली गोदावरी नदी अब विकराल रूप लेती चली जा रही हैं। कोंटा और आंध्रप्रदेश के चट्टी के बीच वीरापुरम में पानी सड़क से करीब 5 फीट ऊपर से बह रहा है। छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर नाले में पानी आ जाने से नगर में करीब 50 मीटर तक पानी भर गया है। इंजरम के पास एनएच 30 पर पुल के ऊपर से पानी बहने से आवाजाही ठप है। कोंटा में 5 साल के बच्चे में कोरोना के लक्षण मिलने पर एसडीआरएफ टीम ने नाला पार कराया।
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