राज्य के 14 पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसमें राजधानी रायपुर में पदस्थ तीन अधिकारी- आईपीएस विजय अग्रवाल, आईपीएस राजेश अग्रवाल और टीआई याकूब मेमन शामिल हैं। इन्हें 26 जनवरी 2021 को सम्मानित किया जाएगा। विजय वर्तमान में चंद्रखुरी पुलिस एकेडमी के अधीक्षक हैं। खास बात ये है कि वाे इसी गांव के रहने वाले हैं। उन्हाेंने एकेडमी के पास बने दाे कमरे के सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर ही आईपीएस बनने तक का सफर तय किया है। वहीं, आईपीएस राजेश अग्रवाल ऑपरेशन मुस्कान चलाकर 84 नाबालिगाें बच्चों को परिवार से मिलवाने की पहल कर चुके हैं। याकूब मेमन राज्य के घोर नक्सल क्षेत्राें में 20 से ज्यादा एनकाउंटर ऑपरेशन चला चुके हैं। पढ़िए तीनों की कहानी।
राजेश अग्रवाल, आईपीएस, एआईजी सीआईडी
1 दिन में सबसे ज्यादा 257 स्थायी वारंट कर चुके हैं जारी, रोज करते हैं एक दोस्त से बात
23 साल के करियर में कई मर्डर मिस्ट्री सॉल्व करने वाले आईपीएस राजेश अग्रवाल जब अपने गांव मटियारी से शहर आए थे तो लोगों से बात करने में भी झिझकते थे। सिटी भास्कर से बातचीत में 50 साल के राजेश अग्रवाल ने बताया, गांव की तुलना में शहर की दुनिया काफी अलग थी। मैंने तय किया कि सबसे पहले अपना आत्मविश्वास बढ़ाना होगा। वक्त के साथ अपने इस लक्ष्य में कामयाब भी रहा। 1997 में डीएसपी बना। जब दुर्ग में पोस्टिंग थी तब ऑपरेशन मुस्कान चलाया था। इसके तहत हमने एक महीने में 84 बच्चों को मां-बाप से मिलवाया। जिंदगी में कई केस सुलझाए हैं, लेकिन खोए हुओं को अपनों से मिलवाकर जो सुकून मिला वो किसी दूसरे काम में नहीं मिला। जब बच्चे अपने पैरेंट्स से मिलते थे तो उनके चेहरे की खुशी देखकर मन को संतुष्टि मिलती थी। एक दिन में 257 स्थायी वारंट जारी करवाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। भिलाई के बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड की गुत्थी भी उन्हीं के नेतृत्व में सुलझाई गई थी। अपनी स्ट्रेंथ और शौक के बारे में उन्होंने बताया, मुझे दोस्तों से बात करना बहुत अच्छा लगता है, इससे मन को सुकून मिलता है। चाहें कितना भी बिजी रहूं, रोज कम से कम एक दोस्त से बात जरूर करता हूं।
याकूब मेमन, टीआई, टिकरापारा

तस्करों को पकड़ने शुरू किया एंटी ड्रग ऑपरेशन
46 साल के याकूब मेमन को 2016 में राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है। 22 साल के करियर में वे लगभग 10 साल नक्सल क्षेत्रों में पदस्थ रहे हैं। बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे बीहड़ नक्सली क्षेत्रों में 20 से ज्यादा ऑपरेशन चला चुके हैं। एंटी ड्रग ऑपरेशन चलाकर तस्करों को पकड़वाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। याकूब ने बताया, पिछले दो सालों से रायपुर में पोस्टेड हूं। मेरा मकसद अपने थाना क्षेत्र को अपराध मुक्त करना हैै। जब जगदलपुर नगरनार थाना में पदस्थ था तब राज्य का प्रथम थाना सम्मान मिला था। रायपुर में भी यही कोशिश जारी है।
विजय अग्रवाल, आईपीएस, अधीक्षक चंद्रखुरी पुलिस अकादमी

गांव के जिस सरकारी स्कूल में पढ़े अब उसी के पास बनी पुलिस अकादमी के अधीक्षक
47 साल के विजय अग्रवाल ने चंद्रखुरी स्थित जिस सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है, अब उसी के पास बनी पुलिस अकादमी के अधीक्षक के तौर पर राज्य के युवा पुलिस अधिकारियाें काे ट्रेनिंग देने का जिम्मा संभाल रहे हैं। वे मूल रूप से चंद्रखुरी के ही रहने वाले हैं। पिता किसान थे। आय सीमित थी। 8वीं तक की पढ़ाई ऐसे सरकारी स्कूल में हुई जहां महज दाे कमरे थे। लाइट तक नहीं थी। बेहतर शिक्षा के लिए पिता ने प्राइवेट स्कूल में दाखिला करा दिया। स्कूल एजुकेशन के बाद साइंस कॉलेज से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की। स्कूल और काॅलेज की पढ़ाई के दाैरान कई ऐसे माैके आए जब फीस भरने के लिए भी पैसे नहीं हाेते थे, लेकिन पिता ने किसी तरह पढ़ाई जारी रखी। पीजी कंप्लीट हाेने के बाद पीएससी की तैयारी के लिए भोपाल चले गए। मेहनत रंग लाई और अक्टूबर 1998 में डीएसपी गए। 22 साल करियर में वे कई मर्डर मिस्ट्री और पेचीदा केस सुलझा चुके हैं। यही नहीं, वीवीआईपी ड्यूटी के तहत वे अटल बिहारी बाजपेयी से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह और पीएम नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा का जिम्मा भी संभाल चुके हैं।
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