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पदाधिकारी बोले बस्तर के 7 मुद्दे किए गए तय, जिस पर होगा आंदोलन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेटियों को भी पिता की संपत्ति पर अधिकार देने और धर्मांतरण के खिलाफ अब सर्व आदिवासी समाज सामने आ गया है। अलग-अलग 7 मुद्दों को लेकर समाज ने बैठक कर अब स्पष्ट रूप से विरोध करने की तैयारी कर ली है। इसमें मुख्य रूप से धर्मांतरण के मामले पर समाज के लोगों को पुरजोर तरीके से विरोध करने और आने वाले समय में इस पर रणनीति बनाने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा पेसा कानून, बोधघाट परियोजना, शहर में नजूल जमीन को सरकार द्वारा बेचने, गांवों में हर साल गिरदावली कराने, पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। समाज के पदाधिकारियों ने मुद्दों को लेकर आने वाले समय में वृहद स्तर पर कार्यक्रम चलाने और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की बात कही है। बैठक में समाज के प्रदेश समिति के संरक्षक अरविंद नेताम, प्रदेश उपाध्यक्ष राजाराम तोड़ेम, कोषाध्यक्ष फूलसिंह नेताम, केदार कश्यप, डॉ. सुभाऊ कश्यप, कौशल नागवंशी, सोनाराम सोरी, दशरथ कश्यप, लच्छूराम कश्यप, महेश कश्यप, धरम सोढ़ी, सुखराम नाग, अशोक मंडावी, चमेली जीराम, लक्ष्मी गरत, रामवती भंडारी सहित अन्य मौजूद थे।

गैर आदिवासी लोग दे रहे जनजातीय क्षेत्रों में दखल
सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों को पिता की संपत्ति पर अधिकार दिए जाने प पदाधिकारियों ने कहा कि गैर आदिवासी लोग इस कानून का दुरूपयोग करेंगे। आदिवासी महिलाओं से गैर आदिवासी समाज के लोग शादी कर उनकी पैतृक संपत्ति पर अधिकार जमाने के साथ ही आदिवासी महिलाओं के नाम से जमीन की खरीदी-बिक्री करने, उन्हें चुनाव लड़ाकर आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ऐसे में जनजातीय क्षेत्रों में गैर आदिवासी लोगों का दखल बढ़ जाएगा। अनुसूचित क्षेत्रों में इस तरह के अंदेशों को ध्यान में रखते हुए सर्व आदिवासी समाज अलग से रूपरेखा तैयार करेगा।

धर्मांतरण के विरोध में आगे आया आदिवासी समाज देवी-देवताओं का बताया अपमान
सर्व आदिवासी समाज द्वारा तय किए गए 7 मुद्दों को लेकर आदिवासी विश्राम भवन में पिछले दिनों बैठक हुई, जिसमें प्रदेशस्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से धर्मांतरण का विरोध करते हुए इसके लिए वृहद स्तर पर आंदोलन करने की तैयारी करने पर सहमति दी। समाज के प्रदेश समिति के संरक्षण अरविंद नेताम ने कहा कि धर्मांतरण के जरिए आदिवासियों की मूल संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाजों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही जाति व्यवस्था को भी नष्ट करने का प्रयास हो रहा है।



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