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75 किलो चांदी के सिंहासन पर बूढ़ापारा के विघ्नहर्ता, भक्त आज बांधेंगे मन्नती नारियल

शनिवार से 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है। घर-पंडालों मेें गणेश स्थापना होगी। संक्रमणकाल में मंदिर-पंडालों में ज्यादा भक्तोें को प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसे में भास्कर आपको घर बैठे दर्शन कर रहा है शहर के प्रमुख गणेश मंदिर की।

  • 75 किलो चांदी का है सिंहासन। इसके अलावा छत्र और मूषक 5 किलो चांदी से बनाया गया है।
  • 4 फीट की प्रतिमा एक पत्थर से बनाई गई है। 45 साल पहले इसे भाटापारा से लाया गया था।
  • भगवान को एक कपड़ा एक बार ही पहनाया जाता है। भक्त पहले से इसकी बुकिंग कराते हैं।

जानिए मंदिर से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारी
बूढ़ापारा का गणेश मंदिर... शहर में इकलौती जगह है जहां बप्पा को विघ्नहर्ता के रूप में स्थापित किया गया है। भगवान का सिंहासन 75 किलो चांदी से बना है। वहीं उनकेे प्रिय गण मूषक की प्रतिमा भी करीब 4 किलो चांदी से बनी है। मंदिर में ही बरगद का एक पेड़ भी है। गणेशोत्सव में भक्त मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां नारियल बांधते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश साठे, सुधीर राजवैद्य ने बताया कि मंदिर के बरगद वृक्ष में वर्तमान में 50 से ज्यादा नारियल बंधे हुए हैं। जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है वे नारियल फोडने के लिए मंदिर वापस आते हैं। यहां स्थापित प्रतिमा दक्षिणमुखी है। इसी वजह से इसकी ख्याति न केवल शहर, बल्कि प्रदेशभर में है। इस बार गणेशोत्सव सादगी से मनाया जाएगा। शनिवार सुबह 4.30 बजे 51 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक होगा। 7.30 बजे से मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।



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Devotees of Budhapara on the 75 kg silver throne, devotees will tie a votive coconut today


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