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भंगाराम जात्रा में पहली बार 70 की जगह सिर्फ एक देवता पहुंचे

कोरोना का असर केशकाल में 100 साल से चले आ रही भंगाराम जात्रा पर दिखाई दिया। पहली बार जहां देवी-देवताओं को सजा देने के लिए लगने वाली अदालत नहीं लगी तो वहीं केवल कुंवर आंगा को इस जात्रा में शामिल किया गया। बाकी के आंगा को इस जात्रा में शामिल होने के लिए निमंत्रण तक नहीं दिया गया था। हर साल इस तिथि पर लगने वाले मेले में 60-70 आंगा देव आया करते थे। और उन एक आंगा के साथ गांव के लगभग 15 से 20 लोगों का दल पूरे साजो सामान राशन के साथ पहुंचता था, जहां दिनभर मेला चलने के बाद रात रुक कर दूसरे ही दिन बिदाई होती थी, जो इस साल नहीं हो सका ।
शनिवार की सुबह सालों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हुए 9 परगना के 45 और भंगाराम समिति के लोग मेले में पहुंचे और वहां पर पूजा पाठ किया । पूजा के दौरान किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो कोरोना संक्रमण को लेकर जिला प्रशासन से जारी आदेश का पालन करने के तहत एक बार में केवल दो लोगों को मंदिर के अंदर प्रवेश दिया। इसका विरोध न तो समिति वालों ने किया और न ही पुजारियों ने किया।

सैनिटाइज करने के बाद मिला प्रवेश
भंगाराम जात्रा में शामिल होने वाले लोगों को मास्क पहनना जरूरी किया था। तहसीलदार राकेश साहू ने कहा कि इस जात्रा में शामिल होने वालों को लोगों के हाथ को सबसे पहले सैनिटाइज करवाया गया। इसके अलावा हर व्‍यक्ति का मास्क लगाने के बाद ही प्रवेश मिला। साहू ने बताया कि भंगाराम को इस पूरे परगना का सबसे बड़ा देव माना जाता है। यही वजह है कि केशकाल का धार्मिक महत्व गोब्रा हीन ,टाटा मारी की तरह इस मेले से बढ़ जाता है। एक ही तिथि में एक साथ भंगा राम केशकाल , माझीन गढ़ विश्राम पूरी व देव् मेला खुर्सी घाट लगता है । परंतु इस वर्ष खुर्सी घाट मेले की तिथि बदल दी गई है।



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For the first time in Bhangaram Jatra, only one deity arrived in place of 70


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