जिले में पीडब्ल्यूडी की 400 किलोमीटर की सड़कों की रिपेयरिंग पर हर साल 4 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। पैच रिपेयरिंग,डब्ल्यूबीएम और डामरीकरण के बाद उखड़ी सड़कों पर फिर से जानलेवा गड्ढे हो गए हैं। अफसरों ने इनके सुधार के लिए प्रस्ताव ऐन जून महीने में शासन को भेजा। यानी जो काम बारिश के पहले हो जाता, वह अब बारिश के बाद होगा।
बारिश के पूर्व कार्य कराने से उसके पुन: उखड़ने की आशंका रहती है, इसलिए अफसर ठेकेदारों से मिलीभगत के चलते कम टिकाऊ कार्य कर पैसे बचाने के लिए देर से प्रस्ताव भेजते हैं। शहर में गोलबाजार से जगमल चौक,मोपका से कोनी,शनिचरी से अपोलो जाने वाली सड़क, चांटीडीह सब्जी बाजार से साइंस कॉलेज वाली सड़क और सरकंडा सीपत आदि रोड पर इतने गड्ढे हैं कि सड़क ढूंढनी पड़ती है।
दो साल में 7.42 करोड़ की सड़क उधड़ी
पीडब्ल्यूडी के कोटा सब डिवीजन अंतर्गत बेलगहना मार्ग पर पांच किमी की 7.42 सड़क वर्ष 2018 में बनाई गई थी। सड़क में से डामर से गिट्टी उखड़कर ऊपर आ चुकी है। सड़क निर्माण के दौरान डामर का अनुपात सही नहीं होने से सड़क उधड़ गई और गिट्टियों के ढेर बिखर गए।
जिम्मेदार: कार्यपालन अभियंता महादेव लहरे ने कहा कि मार्ग का निरीक्षण किया गया, सड़क की स्थिति सही है।
संजय तरण पुष्कर रोड पर गड्ढे
संजय तरण पुष्कर से इंदु चौक तक की सड़क दो साल के अंदर ही उधड़ गई। सड़क का निर्माण सांई कंस्ट्रक्शन ने किया था। सड़क निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की जांच की गई थी लेकिन दो साल के अंदर ही गड्ढे नजर आ रहे हैं।
जिम्मेदार: ईई केआर गंगेश्री के मुताबिक सड़क अभी ठेकेदार के परफार्मेंस गारंटी में है इसलिए पीजी से काम कराया जाएगा।
11 पुल में से 3 पुलों की हालत खस्ता
शहर में सेतु विभाग के 11 पुल और ओवरब्रिज हैं। इनमें से चुचुहियापारा, उसलापुर और तुर्काडीह में गड्ढों की मरम्मत बरसात के पहले हो जानी थी। इसके लिए शासन से 3 करोड़ 2 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी जिसमें 1 करोड़ 44 लाख की राशि मरम्मत पर खर्च की गई है।
जिम्मेदार: ईई आरएस तोमर के अनुसार बारिश के पहले मरम्मत कराई गई थी उसके बाद भी गड्ढे हो गए।
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