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खंडवर्षा से दुर्गूकोंदल व भानुप्रतापपुर में 40% भी बारिश नहीं, पड़ी दरारें

जून में अच्छी बारिश के बाद जुलाई में बारिश ने धोखा दिया जिसके चलते जिला खंड वर्षा की चपेट में आ गया है। औसत के मुकाबले जिले में मात्र 60 प्रतिशत ही बारिश हो पाई है। बारिश कमजोर होने से किसान रोपा कार्य में पिछडऩे लगे हैं। जिले में रोपा कार्य अब तक मात्र 78 प्रतिशत ही हो पाया है। 22 प्रतिशत रोपा कार्य शेष है। खासकर जिले की दो तहसीलों भानुप्रतापपुर तथा दुर्गूकोंदल में तो बारिश की स्थिति बेहद कमजोर है जहां औसत के मुकाबले 40 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है।
इस वर्ष अगस्त तक की स्थिति में जिले में 455.3 मिमी बारिश हुई है। गत वर्ष इस अवधि में 580.8 मिमी बारिश हुई थी जबकि इसी अवधि की जिले की औसत बारिश 750.3 मिमी है। आंकड़ों के अनुसार जिले में गत वर्ष के मुकाबले 22 प्रतिशत तो जिले की औसत वर्षा के मुकाबले 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जिले में बारिश की सबसे गंभीर स्थिति दुर्गूकोंदल तथा भानुप्रतापपुर तहसीलों में है।

रोपाई में पिछड़ रहे किसान
कमजोर बारिश की वजह से जिले के किसान रोपा कार्य में पिछड़ गए हैं। जिले में धान का रोपा 74 हजार हेक्टेयर में होना था जिसमे से 57 हजार हेक्टेयर में ही हो पाया है। प्रतिशत में बात करें तो जिले में रोपा कार्य 78.03 प्रतिशत ही हो पाया है। 22 प्रतिशत रोपा कार्य होना अभी भी शेष है। इसी प्रकार धान की बोनी 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर में होना था जिसमे से 1 लाख 4 हजार हेक्टेयर में हो गई है। 3 हजार हेक्टेयर में बोनी कार्य नहीं हो पाया है। जिन किसानों के खेत सूखे हैं वे बोनी कार्य नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे किसान जिनके पास सिंचाई साधन नहीं हैं उनको ज्यादा परेशानी हो रही है। ग्राम कुरना के उमेश साहू, नवागांव भावगीर के मनोज साहू ने कहा बारिश कमजोर होने से खेतों में खरपतवार उगने लगे हैं। धान का रोपा काम भी प्रभावित हो रहा है।

सिंचाई के जलाशय भी पड़े हैं खाली
कमजोर बारिश का असर जिले के सिंचाई जलाशयों पर पड़ रहा है। जिले में दो मध्यम सिंचाई जलाशय हैं। इसमें मयाना में मात्र 20 प्रतिशत तो परलकोट में 4 प्रतिशत ही जलभराव हो पाया है। जिले में 75 लघु जलाशय हैं जिनमें से 24 प्रतिशत बांध में ही औसतन जलभराव हुआ है। खमडोढग़ी जलाशय में 23 प्रतिशत, मनकेशरी तालाब में 8 प्रतिशत, बेवरती तालाब में 47 प्रतिशत जलभराव हो पाया है। जिले में चार सिंचाई तालाब नेलचांग, डोंरडे, पीवी 42 तथा तेंदुनदी तालाब तो ऐसे हैं जहां शून्य प्रतिशत जलभराव ही हुआ है। 25 प्रतिशत से कम जलभराव वाले 38, 25 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले 27, 50 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले मात्र 7 तो 75 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाला एकमात्र धनेसरा सिंचाई तालाब जहां जिले में सर्वाधिक 83 प्रतिशत जलभराव हुआ है। जिले के एक भी सिंचाई तालाब में शतप्रतिशत जलभराव नहीं हो पाया है।



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40% rain in Khandwarsha to Durgukondal and Bhanupratappur, no cracks


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