जिले में 11 जून से लेकर अब तक हुई 565 मिमी बारिश हुई, फिर भी किसानों को किसानी के लिए परेशानी हो रही। सिंचाई संसाधनों की कमी से जूझ रहे किसानों में सबसे अधिक परेशानी रोपा लगाने वाले किसानों को हो रही है। कम रकबे में अधिक उत्पादन लेने इस विधि से की जाने वाली खेती में इस जिले के सातों ब्लाॅकों में अब तक 30659 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई है, जबकि कृषि विभाग ने इस साल 36 हजार 500 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है।
इस समय धान की सबसे अधिक खेती बकावंड, बस्तर और जगदलपुर ब्लाॅक में हो रही है। इसके अलावा धान की बुआई का लक्ष्य 69500 हेक्टेयर रखा गया है, जिसमें से 70534 हेक्टेयर रकबे में धान की बुआई हो गई है। जानकारी के मुताबिक किसानों ने बारिश की कमी के चलते धान की रोपाई करने की बजाय इसकी बुआई की है, लेकिन धान की बियासी नहीं होने से फसल अच्छी होने की आशंका बनी हुई है।
गौरतलब है कि पिछले साल जिले में 4 अगस्त तक 948 मिमी बारिश हुई थी, जो औसत बारिश से करीब 263 मिमी ज्यादा थी, जबकि इस साल औसत बारिश के हिसाब से अब तक जिले में 722 मिमी होनी थी, लेकिन अब तक जिले में 565 मिमी बारिश हुई है। कृषि विभाग के सहायक संचालक विकास साहू ने कहा कि बारिश की कमी के चलते इस साल खरीफ की फसल प्रभावित हो रही है। धान की खेती उनमें से एक है। किसान इस साल रोपा से ज्यादा धान की बुआई की है, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा।
रोपाई बस्तर व बकावंड में सबसे अधिक प्रभावित
धान की रोपाई को लेकर सबसे अधिक खेती जिले के बस्तर और बकावंड ब्लाॅक में की जाती है। बारिश नहीं होने से इसका सबसे ज्यादा असर इन दोनों ब्लाॅकों में की जाने वाली धान की रोपाई पर पड़ रहा है। इस साल जहां बकावंड में 10 हजार 200 तो वहीं बस्तर ब्लाॅक में 11 हजार 700 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया, जिसमें से अब तक बस्तर ब्लाॅक में 7630 तो वहीं बकावंड ब्लाॅक में 6689 हेक्टेयर में ही किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। इन दोनों ब्लाॅक में इस साल किसान धान की खेती रोपा पद्धति से करने में जुटे थे, लेकिन बारिश की कमी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कीट प्रकोप से बचाने दी सलाह: कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा ने बताया धान की फसल में तना छेदक एवं गंगई प्रमुख कीट हैं, जो दोनों ही पौधे के मुख्य प्ररोह क्षेत्र में आक्रमण कर पूर्ण क्षति पहुंचाते हैं। कृषक प्रोफेनोफोस 750 मिली प्रति हेक्टेयर या कार्बोसल्फान 1000 मिली प्रति हेक्टेयर या थायोमेथोक्साम 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर में से किसी एक दवा का छिड़काव कर सकते हैं।
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