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वर्कऑर्डर के बाद भी काम नहीं कर रही हैं एजेंसियां राजधानी में 283 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट अधूरे

स्मार्ट सिटी के करीब 283 करोड़ के 15 अहम प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चल रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के नियमों के अंतर्गत काम में लेटलतीफी करने वाली एजेंसियों पर प्रोजेक्ट की लागत का 6 फीसदी तक हर्जाना वसूल करने का प्रावधान भी है। इस लिहाज से स्मार्ट सिटी 15 कामों को कर रही ठेका कंपनियों से करीब 17 करोड़ का फाइन वसूल कर सकता है। इतना ही नहीं करीब 35 करोड़ के 20 काम पूरे करने वाली ठेका कंपनियों पर तय मानकों और गुणवत्ता के आधार पर 2 से 10 करोड़ तक का हर्जाना तक मांग सकता है। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि चार साल में काम में देरी के लिए स्मार्ट सिटी ने अब तक केवल एक ही एजेंसी पर करीब एक करोड़ के फाइन वसूलने का नोटिस थमाया है। जबकि जवाहर मार्केट में देरी के लिए अभी फाइन वसूलने की तैयारी लॉकडाउन के चलते ठंडे बस्ते में चली गयी है। यानी तीस से ज्यादा ऐसी एजेंसियां हैं जिन पर स्मार्ट सिटी ने आज तक कोई एक्शन नहीं लिया है। वहीं जनवरी 2020 के बाद शुरू होने वाले आधा दर्जन छोटे बडे़ ज्यादातर सौंदर्यीकरण के काम को करने वाली एजेंसियां तालाबंदी की आड़ में ऐसे नोटिस के राडार पर आने से बचने की कवायद में जुटी है।

भास्कर टीम ने स्मार्ट सिटी के तमाम कामों के दस्तावेजों की जब बारीकी से स्टडी की तो ये गड़बड़ी सामने आई। यही नहीं इसी वजह से स्मार्ट सिटी को अपना एक्शन प्लान और बजट तक कम करने की नौबत आ रही है।
एक माह में नहीं बना डिजाइन
भास्कर ने ठेके के स्मार्ट खेल की जब पड़ताल की तो इसमें स्मार्ट सिटी के ज्यादातर काम एजेंसियों के मनमाफिक तरीके से हो रहे हैं। 10 करोड़ के शास्त्री मार्केट के काम का वर्क आर्डर हुए एक माह का वक्त बीत चुका है। लेकिन एजेंसी ने अभी तक नया ड्राइंग डिजाइन फाइनल नहीं किया है। पड़ताल में पता चला है कि एजेंसी बारिश के चार महीने बीतने तक काम शुरू करने के पक्ष में नहीं है। तालाबंदी को वजह बताकर अधिकारियों के साथ कंपनी टालमटोल कर रही है। इसी तरह तीन करोड़ की स्मार्ट नाली का भी काम है। जिस पर वर्क आर्डर होने के बाद बारिश के बाद काम करने की हीलाहवाली हो रही है।
ऐसे रवैये से एक भी वक्त पर नहीं
स्मार्ट सिटी के कुल जमा बीस काम पूरे हुए हैं। 15 काम चल रहे हैं, 22 कामों में ज्यादातर काम या तो टेंडर प्रक्रिया में है या फिर वर्क आर्डर हासिल करने के बाद ठेका कंपनियां हाथ पर हाथ धरकर बैठी हैं। स्मार्ट पार्किंग, स्मार्ट टायलेट जैसे काम को बीच में अधूरा छोड़कर जाने वाली आधा दर्जन कंपनियों पर भी आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। सौंदर्यीकरण के छोटे छोटे काम का टेंडर ही नहीं निकाला जाता, ऐसे 10 से 20 करोड़ से ज्यादा के काम बीओडी के माध्यम से मंजूरी लेकर साल भर करवाए जा रहे हैं।

ठेका कंपनी को ब्लैक लिस्ट करेंगे
"देरी करने वाली एजेंसियों का आंकलन जारी है केवल 6% जुर्माना ही नहीं ऐसे एजेंसियों पर बड़ी खामी पाए जाने पर ब्लैक लिस्ट करेंगे। वर्कआर्डर के बाद काम नहीं कर रही एजेंसियों को नोटिस जारी करेंगे।"
- एसके सुंदरानी, जीएम, स्मार्ट सिटी



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