266 रुपए का यूरिया बिक रहा 400 में, जिले में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक फिर भी कांकेर के परलकोट में सबसे बुरा हाल
इस साल किसानों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन की वजह से किसान परेशान रहे। जून महीने में शुरुआती अच्छी बारिश के बाद जुलाई और अगस्त के पहले सप्ताह तक जिला खंडवर्षा की चपेट में रहा। अगस्त के दूसरे सप्ताह बारिश की स्थिति सुधरी और बारिश का आंकड़े में सुधार हुआ। औसत बारिश के मुकाबले 5 प्रतिशत स्थिति सुधरकर 65 प्रतिशत तक पहुंची।
अब हो रही रिमझिम बारिश से खाद डालने आदर्श स्थिति है। इस दौरान व्यापारियों ने यूरिया की कृत्रिम किल्लत बनाकर कालाबाजारी शुरू कर दी। जिले के परलकोट क्षेत्र में तो 266 रुपए निर्धारित मूल्य वाला
यूरिया 400 रुपए तक बिक रहा है। इधर कृषि विभाग का कहना है जिले में यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कुछ व्यापारी कृत्रिम किल्लत बनाकर कालाबाजारी कर रहे होंगे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के अनुसार खेत जब सूखे रहते हैं तब तथा जब बहुत ज्यादा पानी गिरता है तब दोनों ही स्थितियों में खेतों में खाद नहीं डाली जा सकती। अगस्त के दूसरे सप्ताह से बारिश ने जोर पकड़ा और वर्तमान में रिमझिम बारिश हो रही है जो खेतों में खाद डालने आदर्श स्थिति है। एकाएक यूरिया की मांग बढ़ने से व्यापारियों ने यूरिया की कृत्रिम शार्टेज करते कालाबाजारी शुरू कर दी है।
यूरिया की निर्धारित दर 266 रुपए प्रति बोरी है जिसे 400 रुपए तक बेच रहे हैं। किसान देवब्रत मंडल, विधान राय, विकास साहा, उदय मिस्त्री आदि ने बताया उन्होंने बाजार में दुकानों से यूरिया खरीदा जिसे व्यापारी 400 रुपए में बेच रहे हैं। सप्ताहभर पहले तक यही खाद बाजार में 300 रुपए तक बिक रही थी। बता दें कि यूरिया की वास्तविक कीमत 266 रुपए है लेकिन व्यापारी परिवहन लागत के नाम पर 300 रुपए तक किसानों से वसूलते थे।
केवल लोन लेने वाले किसानों को मिलता है लैंप्स से यूरिया
लैंप्स प्रबंधक पखांजूर रतन हालदार ने बताया यूरिया की निर्धारित कीमत 266 रुपए प्रति बोरी है। लैंप्स से केवल उन्हीं किसानों को यूरिया दिया जाता है जिन्होंने संस्था से खेती करने लोन लिया है। किसानों को लोन राशि के बदले यूरिया दिया जाता है। अन्य बैंकों से खेती के लिए लोन लेने वाले किसानों को भी बाजार से ही खाद लेना पड़ता है क्योंकि ऐसे किसानों को लैंप्स से खाद नहीं मिलता है।
1 सप्ताह से सिंगारभाठ सहकारी विपणन समिति में खाद ही नहीं
सिंगारभांट स्थित सहकारी विपणन एवं प्रकिया समिति में भी खाद का नगद विक्रय किया जाता है। यहां किसान अपना पट्टा दिखाकर उस अनुपात में यूरिया तथा अन्य खाद खरीद सकते हैं। यहां भी पिछले एक सप्ताह से यूरिया व सुपर फास्पेट खाद नहीं होने से किसानों को परेशानी हो रही है। वर्तमान में यहां केवल पोटाश व डीएपी उपलब्ध है, लेकिन यूरिया व सुपर फास्पेट की ज्यादा मांग है।
कालाबाजारी की जांच कराई जाएगी: कृषि सहायक संचालक
कृषि विभाग के कृषि सहायक संचालक सूरज पंसारी ने कहा जिले में यूरिया तथा अन्य सभी खाद की कहीं कोई कमी नहीं है। जिले में यूरिया का लक्ष्य 13500 टन है जिसके एवज में जिले में 20617 टन यूरिया का भंडारण है। अब तक जिले में 13163 टन यूरिया बिक चुका है। पखांजूर या जिले में कहीं भी कोई भी व्यापारी निर्धारित से अधिक कीमत पर यूरिया या अन्य खाद बेचे तो तत्काल शिकायत करें। उक्त व्यापारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग करता है खाद दुकानों पर नियंत्रण
जिले में खाद उपलब्ध कराने का जिम्मा जिला विपणन संघ का होता है लेकिन दुकानों में खाद सही कीमत पर बिके इसका जिम्मा कृषि विभाग का होता है। पखांजूर के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एसआर भास्कर ने कहा यूरिया की कालाबाजारी की जानकारी नहीं है। इसकी पड़ताल कराई जाएगी। कहीं गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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