शुक्रवार को 26 की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। इसके साथ ही कोरोना को लेकर बरती जा रही लापरवाही भी खुलकर सामने आई है। 26 में से 15 मरीज 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर जब सेंटर से बाहर चले गए तब उनकी रिपोर्ट आई है। इनमें से 14 बीएसएफ के जवान व एक मजदूर शामिल हैं। जब रिपोर्ट पाॅजिटिव आई तो कुछ जवान अंदरूनी इलाकों के अपने कैंपों में ड्यूटी करने लगे थे तो प्रवासी मजदूर गांव तथा नदी की सैर कर रहे थे।
रिपोर्ट आने के बाद जब इनकी क्वारेंटाइन सेंटरों में मौजूदगी की जानकारी ली तो स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया, क्योंकि 26 मरीजों में 15 कोरोना पाॅजिटिव क्वारेंटाइन सेंटरों में नहीं थे। विभाग इनकी तलाश शुरू कर दी है।
7 अगस्त को जिले के कोरोना पाॅजिटिव मरीजों की रिपोर्ट जारी की गई। इसमें अंतागढ़ के दंडकवन बीएसएफ कैंप के 12 जवान, अबूझ कैंप के 2 जवान, चारामा के हाराडुला, नरहरपुर के रावस, अंतागढ़ के आमागांव, दुर्गूकोंदल के कोंडे के एक-एक मजदूरों के अलावा भानुप्रतापुर के भेजा के आठ लोग शामिल हैं।
दोपहर को आई 18 कोरोना पाॅजिटिव की सूची के जवान व मजदूरों का सैंपल 24 जुलाई को लिया गया था। रिपोर्ट 14 दिन बाद 7 जुलाई को जारी की गई, जबकि ये सभी पिछले 14 दिन से अधिक समय से क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे थे। इनमें से 15 लोगों को क्वारेंटाइन सेंटर से छोड़ दिया गया है, जिसमें 14 जवान व 1 मजदूर शामिल हैं।
इसके अलावा तीन प्रवासी मजदूर ग्रामीण अब भी क्वारेंटाइन सेंटर में हैं। 14 जुलाई को भिलाई से क्वारेंटाइन सेंटर में 14 दिन बिता 30 जवानों का जत्था दंडकवन पहुंचा था। इन जवानों को दंडकवन कैंप के क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था। दस दिन बाद 24 जुलाई को इन जवानों का स्वाब सैंपल लिया गया था। जब 14 दिन बाद भी जवानों की रिपोर्ट नहीं आई तो उन्हें 20 दिन बाद क्वारेंटाइन सेंटर से छोड़ अलग-अलग ड्यूटी में तैनात कर दिया गया।
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