कोरोना संक्रमण के कारण चारामा विकासखंड के मूर्तिकारों की मूर्तियां इस बार बिक नहीं पाई। परेशान मूर्तिकार जिला मुख्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपते कहा मूर्तियां नहीं बिकने से उनका भारी नुकसान हुआ है। वे कर्ज से लद गए हैं। प्रशासन को आर्थिक सहायता देना चाहिए या तो उन्हें उनकी कला के अनुरूप काम उपलब्ध कराना चाहिए। आर्थिक मदद या काम नहीं मिला तो उनके समक्ष भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। 25 अगस्त को चारामा विकासखंड के 16 मूर्तिकार जिला मुख्यालय पहुंचे तथा प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेखित है की हर साल गणेश पर्व में उनकी बड़ी संख्या में मूर्तियां बिकती है जिससे उनको अच्छी आय हो जाती है तथा इसी से उनका परिवार पलता है।
इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कम मूर्तियां बनाई लेकिन उनमें से भी एक चौथाई ही बिक पाई। शासन प्रशासन ने गणेश पर्व को लेकर जो कड़ी गाइडलाइन जारी की है तथा गांव गांव में मुनादी कराई उसके चलते मूर्तियां नहीं बिकी। कुछ बड़ी मूर्तियों के आर्डर मिले थे उन्हें भी समिति के लोगों ने स्थगित करा दिए। मूर्तिकारों के अनुसार 4 फीट तक की एक हजार मूर्तियां तैयार की थी लेकिन इनमें से भी मात्र 250 ही बिक पाई। मूर्तिकार चिंताराम चक्रधारी ने कहा 100 मूर्तियां तैयार की थी लेकिन सिर्फ 28 मूर्तियां ही बिकी। मूर्तियां नहीं बिकने से काफी नुकसान हुआ है।
शोभाराम चक्रधारी ने 110 मूर्तियां बनाई थी जिसमे से केवल 30 मूर्तियां ही बिक पाई।
मूर्तिकारों के अनुसार उन्होंने रंग, पेंट व अन्य सामान के साथ घर किराए में लेने उधारी लिया था। मूर्तियां बिकने पर कर्ज चुकाते लेकिन नहीं बिकने से कर्ज भी नहीं चुका पा रहे हैं।
बस्तर आर्ट, सीमेंट मूर्ति का काम जानते हैं मूर्तिकार
मूर्तिकारों ने कहा ऐसे संकट के समय शासन प्रशासन उनकी मदद करे नहीं तो उनके परिवार के समक्ष भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। साथ ही मूर्तिकारों का कहना है वे मूर्तिकला के साथ पेंटिंग, बस्तर आर्ट, सीमेंट वाली मूर्तिकला के साथ अन्य काम भी जानते हैं। उन्हें प्रशासन काम उपलब्ध कराए। चारामा से पहुंचे मूर्तिकार शोभाराम चक्रधारी, भीमराज चक्रधारी, लखनलाल चक्रधारी ने कहा शासन उनको या तो आर्थिक मदद प्रदान करे या काम उपलब्ध कराए।
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