पीलूराम साहू | प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए अब हर सर्दी-बुखार होने पर 24 घंटे के भीतर कोरोना जांच अनिवार्य करने की तैयारी है। इससे समय पर इलाज भी शुरू होगा और मौतों की संख्या में कमी आएगी। इस नियम को लेकर सोमवार से लोगों से अपील करने का सिलसिला शुरू होगा। हफ्तेभर बाद ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ महामारी एक्ट के उल्लंघन का केस भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही शासन ने सरकारी एजेंसियों पर भी शिकंजा कसा है। अगर किसी व्यक्ति की जांच रिपोर्ट पाॅजिटिव मिली, तो उसे अधिकतम 3 घंटे के भीतर कोविड केयर सेंटर या अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य किया जा रहा है। ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर दी जाएगी। यह सिस्टम सबसे पहले राजधानी में लागू होगा, क्योंकि प्रदेश के लगभग आधे कोरोना केस और मौतें रायपुर में ही हैं।
प्रदेश में कोरोना के करीब 14 हजार केस मिल चुके हैं, जिनमें से करीब 5 हजार केस राजधानी के हैं। प्रदेश में 4 हजार मरीज अभी अस्पतालों में भर्ती हैं। 118 लोगाें की मौत भी हो चुकी है, जिसमें से 57 रायपुर में है। अर्थात राजधानी में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं, इसलिए कोरोना कोर कमेटी ने इमरजेंसी में बैठक कर रायपुर शहर में रोकथाम के लिए प्लान तैयार किया है। इसका उद्देश्य यही है कि राजधानी में संक्रमण को रोका जा सके।
गंभीर हालत में मरीजों को रेफर से मौतें ज्यादा
एम्स व अंबेडकर अस्पताल में ज्यादातर रेफरल केस में मौतें ज्यादा हो रही है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि अंबेडकर अस्पताल में रोज दुर्ग से तीन से पांच मरीज रेफर होकर आ रहे हैं। उनकी हालत गंभीर होती है। अस्पताल में आने के 24 घंटे के भीतर ऐसे मरीजों की मौत हो रही है। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक ने इस पर मरीजों का इलाज कर रहे व कोरोना कोर कमेटी के डॉक्टरों से कारण पूछा है। डॉक्टरों ने बताया है कि मरीज को गंभीर हालत में रेफर करने के कारण मौतें हो रही है।
सामान्य मरीजों की जांच को नहीं कह रहे डॉक्टर्स
राजधानी में डॉक्टर भी सर्दी-बुखार के मरीजों को कोरोना टेस्ट करवाने की सलाह देने के बजाय बुखार की दवाइयां दे रहे हैं। ऐसे मरीजों में से कुछ का संक्रमण काफी बढ़ जाता है, तब वे अस्पताल पहुंचते हैं। इसे गंभीर माना गया है और तय हुआ है कि अगर ऐसे डॉक्टरों का पता चलेगा तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने पहले ही निजी अस्पतालों को पत्र लिखकर गंभीर मरीजों को बिना सूचना के सरकारी अस्पताल रिफर करने पर आपत्ति की है।
उनसे कहा गया है कि मरीजों को स्टेबल होने तक वहां रखा जाए। इसके बाद एंबुलेंस में डॉक्टर साथ भेजा जाए।
देरी की वजह से बढ़ी मौतें
पिछले सप्ताहभर से रायपुर ही नहीं प्रदेशभर में सैंपलिंग में कमी आई है। लोग सैंपल देने से बच रहे हैं। यही लापरवाही भारी पड़ रही है। जब वे सैंपल देते हैं और रिपोर्ट आती है, तब तक वायरल लोड बढ़ चुका होता है। ऐसे कई मरीजों की स्थिति गंभीर हो रही है और मौत भी हाे रही है। इसलिए सर्दी-बुखार और सांस में तकलीफ जैसे लक्षण वालों को तुरंत जांच करवाने के लिए राजी किया जाएगा। कलेक्टरों व सीएमएचओ को जिम्मा दिया जाएगा कि ऐसा सिस्टम बनाएं कि ऐसे लोगों को समझाया जा सके। इससे संक्रमण तो रुकेगा ही, मरीज गंभीर भी नहीं हो पाएगा।
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