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राम मंदिर आंदोलन में बस्तर से गए थे 182 कारसेवक, कहा- सपना पूरा हुआ

अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास 5 अगस्त को किया जाएगा। इस राम जन्मभूमि आंदोलन में बस्तर से 182 कारसेवक शामिल हुए थे। पहली कार सेवा में 56 और दूसरे में 127 लोग गए थे।
आंदोलन के सूत्रधार, योजनाकार राजबहादुर सिंह राणा थे। उनके साथ सहयोगी के रूप में विभाग प्रचारक शिवराम समदरिया, सनत कुमार महाजन, विश्वनाथ बोगी, स्व.अमर देव, श्रीनिवास मिश्रा थे। जिन्होंने कारसेवकों का परिचय पत्र जारी किया था। स्व.अमर देव के साथ विजय तिवारी, राधेकृष्ण पांडेय, शिव नारायण पांडेय, सुधीर पांडेय, शेष नारायण तिवारी, प्रेम थवनी, श्रीधर ओझा सहित अन्य लोगों का आंदोलन में विशेष योगदान रहा।
कार सेवा में जाने से पहले गिरफ्तार होने वालों में बस्तर से राज बहादुर सिंह राणा, शरद अवस्थी, स्व. शशि शंकर शुक्ला, शेष नारायण तिवारी, शिव नारायण पांडेय, सुधीर पांडेय, श्रीनिवास मिश्रा, अभय साहू, प्रसाद शुक्ला, राम सिंह ठाकुर, स्व.मणिकांत झा, आंनद कलवनी, बिठलूराम, रामलला पांडे, श्रीधर ओझा सहित अन्य शामिल थे। जिन्हें 4 दिन सेंट्रल जेल जगदलपुर में रखा था। पांचवें दिन जमानत पर रिहा हुए। 138 लोगों को जेल में डाल दिया था।

पहली बैठक 1986 में ओसवाल भवन में हुई थी
भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संग्रामसिंह राणा ने बताया कि जगदलपुर में प्रथम बैठक दिसंबर 1986 में ओसवाल भवन में की गई थी। इसके बाद 1987 से पूरे संगठन का ढांचा तैयार किया गया। पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल व्यास, राज बहादुर सिंह राणा, स्व. बलिराम कश्यप, विजय तिवारी, राधेकृष्ण पांडेय, स्व. करसन दास हेमानी, बीएल झा, कल्याण आश्रम से द्वारिकचार्य के मार्गदर्शन से आंदोलन आगे बढ़ा। आंदोलन क्रमबद्ध तरीके से चला। पहले रामशिला पूजन, ज्योति रथ यात्रा, चरण पादुका पूजन के बाद अयोध्या चलो आंदोलन चला। कारसेवकों में बस्तर से भाजपा के 6 विधायक अयोध्या गए थे। जिसमें जगदलपुर से दिनेश कश्यप, कोंडागांव मंगलराम उसेंडी, केशलुर संपत सिंह भंडारी, चित्रकाेट धनीराम पुजारी, केशकाल कृष्ण कुमार ध्रुव, नारायणपुर से शंभू नाथ नायक शामिल थे। उस समय भारतीय जनता पार्टी के विधायक 8 हुआ करते थे, जिसमें स्व. बलीराम कश्यप, अघन सिंह ठाकुर जो मंत्री के रूप में अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे थे।

पहली कार सेवा 1990 हुई थी शुरू
30 अक्टूबर से 2 नवंबर 1990 के बीच प्रथम कार सेवा प्रारंभ हुई थी। उत्तर प्रदेश में भाजपा के समर्थन से मुलायम सिंह की सरकार थी, संयुक्त मोर्चा की सरकार केंद्र में भाजपा के समर्थन से थी। उस समय देश के प्रधानमंत्री वीपी सिंह थे। बस्तर जिले से 6 विधायकों के साथ-साथ 56 कार्यकर्ता कारसेवक के रूप में गए थे। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 में दूसरी बार कारसेवक अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल हुए थे। इन्होंने बाबरी ढांचे को ढहाया गया। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। उसके तुरंत बाद उन्होंने अपने मुख्यमंत्री पद से त्याग पत्र दे दिया।

कारसेवकों ने दी आहुति मिला सार्थक परिणाम
^बस्तर से कार सेवक के रूप में सबसे पहले अयोध्या पहुंचने वाले राजबहादुर सिंह राणा ने कहा कि संपूर्ण विश्व के हिंदू समाज की भावनाएं बुधवार को पूरी हो जाएंगी। सालों पहले जो सपना देखा था जिसे पूरा करने हजारों कार सेवकों ने अपनी आहुति दी, वह पूरा होने जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर बनना बड़े सौभाग्य की बात है।



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182 kar sevaks went from Bastar in Ram temple movement, said dream come true


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