कोरोना काल में माताएं रविवार को अपने बच्चे की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए हलषष्ठी (कमरछठ) का व्रत करेंगी। माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए दिनभर उपवास रखेंगी। फिर शाम को गली-मोहल्लाें और मंदिरों में जुटेंगी और कमरछठ माता की कथा सुनेंगी। इसके बाद पसहर चावल और भैंस के दूध से बनी चाय को पीकर अपना व्रत तड़ेंगी।
इससे पहले शनिवार को पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ रही। पसहर चावल 120-150 रुपए किलो तक बिका। वहीं कासी, खम्हार, दोना-पत्तल, दातून, महुआ, लाई, भाजी समेत दूसरे जरूरी सामान की भी काफी मांग रही। इस दिन शुद्ध दूध की मांग ज्यादा होती है। भैंस के दूध, दही और घी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन व्रती महिलाओं को गाय के दूध, दही और घी का प्रयोग वर्जित है।
यही कारण है कि ज्यादातर महिलाओं ने व्रत के लिए मंगलवार को ही इन चीजों की खरीदी कर ली थी। डेयरियों में दोपहर से देर रात तक भीड़ रही। वहीं, कुछ जगहों पर त्योहार के चलते दूध 80 रुपए लीटर, दही 100 रुपए तो घी 700- 800 रुपए किलो के भाव से बिका।
पुलिस के भगाने के बाद भी बेचा समान
शनिवार को सभी दुकानों को बंद करने का फरमान जिला प्रशासन ने जारी किया था। इसके बावजूद गोल बाजार में करीब 50 से अधिक ग्रामीण और शहर के फूल विक्रेता हलछठ पूजा के लिए समान बेचने पहुंचे थे। दोपहर करीब 12.15 बजे पुलिस के कुछ जवान मौके पर पहुंचे और सामान बेच रहे लोगों को यहां से हटाया लेकिन पुलिस के जाते ही फिर से लोग सड़क किनारे बैठ गए।पसहर चावल, महुआ, लाई, चना और मिट्टी की चुकियों की खरीदारी के लिए गोल बाजार, धरमपुरा , लालबाग समेत शहर के अन्य जगहों में लोग देर रात तक समान खरीदते रहे।
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