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बीजापुर में होम आइसोलेट संक्रमित डाॅक्टर की मौत, इधर संभाग में मिले 135 नए केस

बस्तर संभाग में कोरोना से पहले डाॅक्टर की मौत सोमवार की रात हो गई। डाॅक्टर की मौत की खबर परिजन और प्रशासनिक अफसरों को मंगलवार की देर रात मिली। डाॅक्टर की मौत के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। इलाके में साइलेंट कोरोना डेथ का यह पहला मामला है। डाॅक्टर के कोरोना से मौत की पुष्टि बीजापुर सीएमएचओ बीआर पुजारी ने भी की है। संभाग में बुधवार को 135 नए मरीज मिले हैं।
मिली जानकारी के अुनसार 2016 में डाॅक्टर की तैनाती बीजापुर में की गई थी इसके बाद वह काफी समय तक भैरमगढ़ में पदस्थ थे। वे मूलत: रायगढ़ के रहने वाले थे। कुछ समय पहले ही उनकी पोस्टिंग बीजापुर के जिला हॉस्पिटल में हुई थी। बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल में इलाज के दौरान वे एक पॉजिटिव मरीज के सीधे संपर्क में आ गए थे। इसके बाद रैपिड एंटीजेन टेस्ट में पॉजिटिव निकले थे। टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद उन्हें होम आइसोलेशन में भेज दिया गया था। जिसके बाद सोमवार की रात से ही डाॅक्टर का फोन रिसीव नहीं हो रहा था। मंगलवार को जब दिन में भी डाॅक्टर का फोन रिसीव नहीं हुआ तो परिजन चिंतित हो गए और फिर बीजापुर में तैनात डाॅक्टर के साथियों को जानकारी दी। साथी मंगलवार रात जब डाॅक्टर के घर पहुंचे तो वहां उनकी लाश मिली। चूंकि डाॅक्टर घर पर अकेले ही रहते थे ऐसे में उनकी मौत को सामान्य मौत या कोरोना से मौत न मानते हुए हर सिरे से जांच की शुरुआत की गई। इस बीच बुधवार को उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई। इसके बाद उनकी मौत कोरोना से होने की घोषणा की गई।

कोरोना ड्यूटी कर काम पर लौटे, तब हुए संक्रमित
जिस डाॅक्टर की मौत हुई है उनकी दो महीने पहले ही शादी हुई थी बताया जा रहा है कि डाॅक्टर की ड्यूटी जुलाई में कोरोना वार्ड में लगी थी। ड्यूटी पूरी करने के बाद वे होम क्वारेंटाइन पूरा कर हाल ही में वापस हॉस्पिटल में ड्यूटी के लिए फिर से लौटे थे। इसी दौरान वे एक पॉजिटिव मरीज के सीधे संपर्क में आ गए थे। इसके बाद वे फिर से होम क्वारेंटाइन में चले गए थे। इधर डाॅक्टर की कोरोना से मौत के बाद पूरे इलाके के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

शहीद का दर्जा, मुआवजे के साथ अनुकंपा की मांग
इधर डाॅक्टर की कोरोना से मौत के मामले के बाद अब डाॅक्टरों के संगठन सीडा के अध्यक्ष डॉ. इकबाल हुसैन ने कहा कि मृत डाॅक्टर या स्वास्थ्य कर्मचारी को उचित सम्मान मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा तो उन्हें काम करने से पहले सोचने को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम मांग कर रहे हैं मृतक डाॅक्टर को शहीद का दर्जा देते विशिष्ट सेवा (सिविलियन आवार्ड) का पुरस्कार दिया जाए। इसके अलावा एक करोड़ रुपए की राशि तत्काल दी जाये। परिजन को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।

जानिए, कैसे होती है साइंलेट कोरोना डेथ
डॉ. इकबाल हुसैन के अनुसार डाॅक्टर की मौत ‘पलमोनरी एम्बोलिज्म म्योकार्डियाटिस वेंट्रिक्यूलर टैकिकार्डिया कार्डियक इवेंट्स साइलेंट डिस्फिया’ (जिसे सामान्य शब्दों में ‘साइलेंट कोरोना डेथ’ भी कहते हैं) से हुई है। इसे साधरण शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि अचानक मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है और दिल भी काम करना बंद कर देता है और कुछ ही समय में मरीज दम तोड़ देता है।



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